Markandey Katju on CJP : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने CJP के चार नेताओं के पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे के फैसले की आलोचना की, जबकि छात्र संगठन AISA की नेता नेहा बोरा की तारीफ की। काटजू ने कहा कि नेहा ने पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर अपने संवैधानिक अधिकारों के पक्ष में रुख अपनाया है। उनकी टिप्पणी के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो सकती है।

CJP के चार नेताओं को लेकर क्या बोले काटजू?
मार्कंडेय काटजू ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में CJP के चारों नेताओं को निशाने पर लिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में उन्हें ‘गैंग ऑफ फोर’ कहा और उनके संगठन के नाम को लेकर भी तंज कसा। काटजू के अनुसार, अभिजीत दीपके, सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे ने शांति बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने दावा किया कि इस तरह के बॉन्ड की शर्तें सार्वजनिक प्रदर्शनों में शामिल होने की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, बॉन्ड की वास्तविक शर्तें और उनके कानूनी प्रभाव संबंधित आदेश तथा दस्तावेजों के आधार पर ही तय किए जा सकते हैं।

सार्वजनिक करियर खत्म होने का किया दावा
काटजू ने अपनी पोस्ट में कहा कि उनकी नजर में पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने से चारों नेताओं की सार्वजनिक विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि लोग इसे जेल जाने के डर से उठाया गया कदम मान सकते हैं। अपनी टिप्पणी में उन्होंने इन नेताओं की तुलना उन लोगों से की, जिन्हें ब्रिटिश शासन के दौरान जेल जाने के बाद माफी मांगने पर रिहा किया जाता था। यह तुलना काटजू की निजी राय और राजनीतिक टिप्पणी का हिस्सा है। इसे चारों नेताओं के सार्वजनिक करियर के वास्तविक अंत या उनकी लोकप्रियता में गिरावट का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
नेहा बोरा के फैसले की काटजू ने की तारीफ
काटजू ने AISA की छात्रनेता नेहा बोरा की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वह नेहा का सम्मान करते हैं, क्योंकि उन्होंने पीस बॉन्ड देने से इनकार किया। नेहा का तर्क बताया गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। काटजू ने इस रुख को अपने समर्थन का आधार बनाया। हालांकि, शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और किसी विशेष बॉन्ड की कानूनी शर्तों के बीच संबंध को समझने के लिए संबंधित प्रशासनिक आदेशों और लागू कानूनों को देखना जरूरी है।
‘गैंग ऑफ फोर’ कहकर साधा निशाना
अपनी पोस्ट के अंत में काटजू ने चारों CJP नेताओं पर तंज कसते हुए एक कहावत का इस्तेमाल किया। उन्होंने लिखा कि ये नेता खुद को शेर बताते थे, लेकिन उनके फैसले ने उनकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए। उनकी भाषा से स्पष्ट है कि वह पीस बॉन्ड पर हस्ताक्षर करने को लेकर असहमति जताना चाहते थे। दूसरी ओर, इस विवाद का मूल्यांकन करते समय नेताओं के अपने पक्ष, बॉन्ड की शर्तों और कानूनी प्रक्रिया को भी ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। फिलहाल, काटजू की टिप्पणी इस मुद्दे पर जारी बहस का एक पक्ष प्रस्तुत करती है।

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