Brent Crude 90 Dollar Cross : अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य टकराव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया घटनाक्रम में सऊदी अरब की प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी और मिस्र से जुड़े क्षेत्रों तक तनाव के फैलने की खबरों ने पूरे पश्चिम एशिया की स्थिति को और जटिल बना दिया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है। बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है और अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।

छह महीने से बना हुआ है संघर्ष का माहौल
पिछले छह महीनों से अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पश्चिम एशिया में अस्थिरता का माहौल बना रखा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य इस संघर्ष का प्रमुख केंद्र रहा है। पहले दोनों देशों के बीच बढ़े तनाव के दौरान इस समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। हालांकि जून में दोनों पक्षों के बीच हुए शांति समझौते के बाद स्थिति कुछ सामान्य हुई और कीमतें घटकर 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में लौट आई थीं।

अब सिर्फ होर्मुज नहीं, लाल सागर भी चिंता का कारण
इस बार विशेषज्ञों की चिंता पहले से कहीं अधिक है। अब खतरा केवल होर्मुज जलडमरूमध्य तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि लाल सागर और बाब अल मंडेब जलडमरूमध्य भी संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में शामिल हो गए हैं। ये दोनों समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि इन मार्गों पर लंबे समय तक बाधा आती है, तो दुनिया की बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने और कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बनी हुई तेजी
बीते एक सप्ताह से अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड की कीमतें 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, जबकि ब्रेंट क्रूड 85 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में कारोबार कर रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक अभी भी किसी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं, लेकिन युद्ध का दायरा बढ़ने से यह उम्मीद कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। साथ ही अमेरिका में कच्चे तेल के भंडार में अपेक्षा से अधिक कमी आने से भी आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के करीब कायम
बुधवार रात अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 90.85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जबकि डब्ल्यूटीआई भी 85 डॉलर के स्तर से ऊपर निकल गया। गुरुवार सुबह हल्की मुनाफावसूली देखने को मिली, लेकिन इसके बावजूद ब्रेंट क्रूड अभी भी 90 डॉलर के आसपास बना हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में अनिश्चितता अभी समाप्त नहीं हुई है और निवेशक आगे के घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है सीधा असर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। यदि ब्रेंट क्रूड लंबे समय तक 90 डॉलर या उससे अधिक स्तर पर बना रहता है, तो तेल कंपनियों की लागत बढ़ सकती है। इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ने की संभावना है। ईंधन महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ेगी, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही आयात बिल बढ़ने और चालू खाते के घाटे में वृद्धि की आशंका भी बनी रहेगी, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
क्या फिर 100 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि मौजूदा समय में तेल की कीमतों में “रिस्क प्रीमियम” भी शामिल है। यानी केवल वास्तविक आपूर्ति की चिंता ही नहीं, बल्कि भविष्य में संभावित संकट की आशंका भी कीमतों को ऊपर बनाए हुए है। यदि होर्मुज और बाब अल मंडेब जैसे समुद्री मार्गों पर तनाव और बढ़ता है, तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित होती है या अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष और तेज हो जाता है, तो ब्रेंट क्रूड दोबारा 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच सकता है। वहीं यदि कूटनीतिक प्रयास सफल रहते हैं और समुद्री मार्ग सामान्य रूप से संचालित होते हैं, तो तेल की कीमतों में कुछ राहत मिलने की संभावना बनी रहेगी।
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