Byjus Legal Crisis : संकटों से घिरी शिक्षा-प्रौद्योगिकी (एडटेक) कंपनी ‘बायजू’ (Byju’s) के संस्थापक बायजू रवींद्रन को अंतरराष्ट्रीय कानूनी मोर्चे पर एक बड़ी और महत्वपूर्ण राहत मिली है। सिंगापुर उच्च न्यायालय ने अदालत की अवमानना मामले में रवींद्रन को सुनाई गई छह महीने की जेल की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी है। शुक्रवार को खुद बायजू रवींद्रन द्वारा जारी किए गए एक आधिकारिक बयान में इस कानूनी विकास की जानकारी दी गई।

इससे पहले, सिंगापुर की अदालत ने 25 मई, 2026 को दिए अपने एक कड़े आदेश में वित्तीय और व्यावसायिक खुलासों से जुड़े निर्देशों का पालन न करने का दोषी पाते हुए रवींद्रन को छह महीने की कैद की सजा सुनाई थी। साथ ही, उन्हें 15 जून तक अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का सख्त निर्देश दिया गया था, हालांकि उस समय उनके खिलाफ कोई औपचारिक गिरफ्तारी वारंट जारी नहीं हुआ था।

हाई कोर्ट ने आत्मसमर्पण के आदेश को टाला, हिस्सेदारी के दस्तावेज सौंपने के निर्देश
रवींद्रन के प्रवक्ता द्वारा जारी बयान के मुताबिक, सिंगापुर उच्च न्यायालय की सामान्य पीठ ने 10 जून, 2026 को इस मामले पर बेहद संवेदनशील सुनवाई की। रवींद्रन की याचिका पर विचार करते हुए अदालत ने 25 मई के अवमानना आदेश के तहत जारी की गई गिरफ्तारी और आत्मसमर्पण से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी। इस नए फैसले के बाद अब बायजू रवींद्रन को 15 जून की तय समयसीमा तक आत्मसमर्पण करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है और उनकी जेल की सजा को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है।
हालांकि, राहत देने के साथ ही अदालत ने रवींद्रन को 90,000 सिंगापुर डॉलर (लगभग 70,500 अमेरिकी डॉलर) का कानूनी खर्च भुगतने और सिंगापुर स्थित उनकी प्रमुख इकाई ‘बीईएएआर इन्वेस्टको पीटीई’ (BEAAR Investco Pte) में उनकी शेयर होल्डिंग से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया है।
छवि बिगाड़ने की कोशिशों को रवींद्रन ने बताया दुर्भाग्यपूर्ण, कानूनी लड़ाई लड़ने का संकल्प
जेल की सजा पर रोक लगने के बाद बायजू रवींद्रन ने इस पूरे विवाद पर अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उन्होंने कहा कि जब दोनों पक्ष आपसी समझौते और बातचीत के जरिए विवाद को सुलझाने के गंभीर प्रयासों में जुटे हुए हैं, ऐसे समय में जानबूझकर मीडिया और निवेशकों के बीच गड़बड़ी की भ्रामक धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है, जो कि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
“मैं देश और विदेश की उचित कानूनी प्रक्रियाओं के जरिए अपने खिलाफ बनाई जा रही इस नकारात्मक धारणा को पूरी तरह ठीक करने के लिए प्रतिबद्ध हूं। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि न तो मैंने और न ही कंपनी के अन्य सह-संस्थापकों ने कथित विवादित राशि का कोई भी हिस्सा व्यक्तिगत लाभ के लिए प्राप्त किया है। इसके बिल्कुल विपरीत, मेरे परिवार और मैंने इस कंपनी को खड़ा करने और बचाने में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की अपनी निजी पूंजी लगाई है।” — बायजू रवींद्रन, संस्थापक, बायजू
क्या है पूरा विवाद? कतर निवेश प्राधिकरण की याचिका पर शुरू हुई थी कानूनी कार्रवाई
यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय निवेश और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ा हुआ है। बायजू रवींद्रन के खिलाफ सिंगापुर की अदालत में यह मुकदमा कतर निवेश प्राधिकरण (QIA) की एक पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी कंपनी द्वारा दायर किया गया था। कतर की इस संस्था ने बायजू के एक शुरुआती फंडिंग दौर के दौरान कंपनी में बड़ा वित्तीय निवेश किया था, जिसके बाद धन के इस्तेमाल और पारदर्शिता को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हो गया।
इस बीच, सिंगापुर में रवींद्रन का प्रतिनिधित्व कर रहे वकीलों ने साफ किया है कि अदालत के पुराने अवमानना आदेश को पूरी तरह निरस्त कराने के लिए आवश्यक अपील ऊपरी अदालत में पहले ही दायर की जा चुकी है। वकीलों ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह पूरा मामला विशुद्ध रूप से एक दीवानी और तकनीकी विवाद है, इसका किसी भी प्रकार के आपराधिक कृत्य, धोखाधड़ी या वित्तीय गबन के आरोपों से कोई संबंध नहीं है।











