Tahawwur Rana
Tahawwur Rana citizenship: कनाडा के प्रधानमंत्री पद के प्रबल दावेदार और वर्तमान कूटनीतिक प्रतिनिधि मार्क कार्नी की प्रस्तावित भारत यात्रा से ठीक पहले कनाडा सरकार ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कनाडाई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा ने 2008 के मुंबई आतंकी हमलों (26/11) के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक, तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू कर दी है। इस कदम को भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चल रहे तनावपूर्ण रिश्तों को सुधारने और आतंकवाद के खिलाफ एक साझा संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। 65 वर्षीय राणा वर्तमान में भारतीय जेल में बंद है, जहाँ उस पर 166 लोगों की जान लेने वाले हमलों में सहयोग करने का गंभीर मुकदमा चल रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि कनाडा सरकार राणा की नागरिकता किसी आतंकी गतिविधि के आधार पर नहीं, बल्कि नागरिकता आवेदन के दौरान दी गई गलत जानकारी (Misrepresentation) के कारण रद्द कर रही है। ‘इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा’ (IRCC) ने 31 मई 2024 को ही राणा को इस संबंध में औपचारिक नोटिस जारी किया था। कनाडाई अधिकारियों का कहना है कि राणा ने नागरिकता प्राप्त करने के लिए अपने कनाडा में निवास की अवधि के बारे में सफेद झूठ बोला था। नियमों के अनुसार, गलत जानकारी देकर प्राप्त की गई नागरिकता को रद्द करना देश की आव्रजन प्रणाली की ईमानदारी बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की गहन जांच में तहव्वुर राणा के बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। राणा ने साल 2000 में नागरिकता के लिए आवेदन करते समय दावा किया था कि उसने चार साल तक ओटावा और टोरंटो में रहकर अनिवार्य समय सीमा पूरी की है। उसने अपनी फाइल में महज छह दिन की गैरहाजिरी दिखाई थी। हालांकि, जांच में पाया गया कि जिस दौरान वह कनाडा में होने का दावा कर रहा था, वह असल में अमेरिका के शिकागो में रह रहा था। वहां न केवल उसकी कई संपत्तियां थीं, बल्कि वह एक इमिग्रेशन कंसल्टेंसी और अन्य व्यवसाय भी चला रहा था। फिलहाल यह मामला कनाडा की फेडरल कोर्ट में है, जो नागरिकता रद्द करने की वैधता पर अंतिम मुहर लगाएगी।
पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक तहव्वुर हुसैन राणा का नाम 26/11 के मुंबई हमलों की साजिश में प्रमुखता से आया है। वह आतंकी डेविड कोलमैन हेडली का बचपन का दोस्त है और उस पर लश्कर-ए-तैयबा व हरकत-उल-जिहादी इस्लामी जैसे खूंखार संगठनों को साजो-सामान और वित्तीय मदद उपलब्ध कराने का आरोप है। हेडली ने पूछताछ में स्वीकार किया था कि राणा ने हमलों से पहले रेकी करने और फर्जी वीजा कागजात तैयार करने में उसकी मदद की थी। इस आतंकी हमले ने भारत और वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य को हमेशा के लिए बदल दिया था।
तहव्वुर राणा को भारत लाना भारतीय कूटनीति की एक बड़ी जीत मानी जाती है। लंबे समय तक अमेरिका की जेल में रहने के बाद, भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। राणा ने प्रत्यर्पण रोकने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उसकी सभी दलीलें खारिज कर दी गईं। अंततः, अप्रैल 2025 में उसे भारत लाया गया, जहाँ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। कनाडा द्वारा उसकी नागरिकता रद्द करने की यह ताजा कार्रवाई भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे राणा का कनाडाई सुरक्षा कवच पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
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