अंबिकापुर के फुन्दुरडिहारी में 70 साल पुराने कब्रिस्तान में दूसरे समुदाय के शव दफनाने का आरोप लगा है। रोमन कैथोलिक समुदाय ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई रोकने की मांग की।
अंबिकापुर के फुन्दुरडिहारी में 70 साल पुराने कब्रिस्तान में दूसरे समुदाय के शव दफनाने का आरोप लगा है। रोमन कैथोलिक समुदाय ने कलेक्टर से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई रोकने की मांग की।

Cemetery Dispute Ambikapur : सरगुजा जिले के अंबिकापुर मुख्यालय में मुक्तिपारा-फुन्दुरडिहारी स्थित कब्रिस्तान की भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय की कब्रस्थान निगरानी समिति के अध्यक्ष भानू खलखो ने कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को आवेदन देकर 17 सितंबर 2026 को दूसरे समुदाय के एक मृत व्यक्ति का शव कथित तौर पर रोमन कैथोलिक समुदाय के कब्रिस्तान परिसर में दफनाए जाने की घटना की जांच कराने की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि राजस्व अधिकारियों और पुलिस की मौजूदगी में कब्रिस्तान के गेट का ताला खुलवाकर शव दफनाने की कार्रवाई कराई गई। समिति ने इसे लेकर समुदाय में आक्रोश और भय की स्थिति बनने का दावा किया है।

आवेदन के अनुसार, मुक्तिपारा-फुन्दुरडिहारी क्षेत्र में नजूल भू-खण्ड क्रमांक 120/1 में कुल 39.452 एकड़ भूमि में से करीब 3.30 एकड़ क्षेत्र का उपयोग रोमन कैथोलिक ईसाई समुदाय द्वारा लगभग 70 वर्षों से कब्रिस्तान के रूप में किया जा रहा है। समिति का दावा है कि इस भूमि को बाउंड्रीवाल और गेट लगाकर सुरक्षित किया गया है तथा यहां समुदाय के मृतकों की कब्रें मौजूद हैं।

समिति ने अपने आवेदन में यह भी कहा है कि कब्रिस्तान में दफनाए गए मृतकों का रिकॉर्ड लंबे समय से रखा जाता है और पिछले करीब 35-40 वर्षों का रिकॉर्ड वर्तमान में संस्था के पास सुरक्षित है।
आवेदन में बताया गया है कि नजूल अधिकारी, अंबिकापुर के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 16/अ-6-1/2019-20 में 17 जनवरी 2020 को आदेश पारित किया गया था। समिति के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद नजूल अभिलेखों में प्लाट नंबर 120/1 की कुल भूमि में से 3.30 एकड़ क्षेत्र को कब्रिस्तान के रूप में दर्ज कर सुरक्षित एवं चिन्हांकित किया गया था।
इसके बाद इस प्रविष्टि के खिलाफ अपील प्रस्तुत की गई। आवेदन के मुताबिक, अपर कलेक्टर, अंबिकापुर के न्यायालय ने जुलाई 2026 में नजूल अभिलेखों में दर्ज रोमन कैथोलिक ईसाई कब्रिस्तान की प्रविष्टि को विलोपित करने का आदेश दिया। समिति ने इस आदेश के खिलाफ सरगुजा संभाग के आयुक्त न्यायालय में अपील प्रस्तुत किए जाने और मामला वर्तमान में लंबित होने का उल्लेख किया है।

समिति के आवेदन में आरोप लगाया गया है कि 17 सितंबर को दोपहर करीब 2 बजे नायब तहसीलदार जयेश कंवर राजस्व निरीक्षक और पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में एक मृत व्यक्ति का शव लेकर कब्रिस्तान पहुंचे। आवेदन के अनुसार, शव के साथ बड़ी संख्या में लोग भी मौजूद थे।
समिति का दावा है कि मौके पर उसके अध्यक्ष भानू खलखो और अन्य सदस्यों ने इसका विरोध किया। उनका कहना था कि किसी न्यायालय द्वारा दूसरे समुदाय के व्यक्ति का शव उक्त कब्रिस्तान में दफनाने के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद कब्रिस्तान के गेट का ताला खुलवाकर शव दफनाने की कार्रवाई की गई।
आवेदन में समिति ने आरोप लगाया है कि मौके पर अधिकारियों द्वारा एसडीएम, अंबिकापुर के मौखिक आदेश का हवाला दिया गया था। समिति का कहना है कि मामला आयुक्त न्यायालय में अपील के रूप में लंबित होने के दौरान इस तरह की कार्रवाई को लेकर उसने आपत्ति जताई थी।
हालांकि, इन आरोपों पर प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का पक्ष आवेदन में दर्ज नहीं है। इसलिए पूरे मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच और दोनों पक्षों के तथ्यों के सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
समिति ने अपने आवेदन में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों का उल्लेख किया है। साथ ही अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्ति की गरिमा और सम्मान से जुड़े अधिकारों का हवाला देते हुए कहा गया है कि कब्रिस्तान में लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था और धार्मिक परंपराओं को संरक्षित किया जाना चाहिए।
आवेदन में कहा गया है कि नवंबर की 2 तारीख को समुदाय के लोग अपने पूर्वजों और मृत परिजनों की कब्रों पर एकत्र होकर पूजा-अर्चना और श्रद्धांजलि देते हैं। समिति ने आशंका जताई है कि कब्रिस्तान की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव से समुदाय के बीच असंतोष और दूसरे समुदाय के साथ विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है।
रोमन कैथोलिक ईसाई कब्रस्थान निगरानी समिति ने कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार को दिए आवेदन में पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही कथित रूप से की गई कार्रवाई को रोकने, शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा संस्था के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
आवेदन की प्रतिलिपि सरगुजा संभाग के आयुक्त और सरगुजा पुलिस अधीक्षक को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। आवेदन 25 सितंबर 2026 को अध्यक्ष भानू खलखो के हस्ताक्षर से प्रस्तुत किया गया है। अब मामले में प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद कब्रिस्तान की भूमि एवं शव दफनाने की कार्रवाई को लेकर वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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