CG Flying Snake: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक दुर्लभ और बेहद आकर्षक सांप मिलने के बाद इलाके में चर्चा शुरू हो गई है। यहां पहली बार फ्लाइंग स्नेक यानी उड़ने वाले सांप को देखे जाने की जानकारी सामने आई है। यह सांप धरमजयगढ़ से कोरबा पहुंचे एक ट्रक में मिला। ट्रक में सांप को देखकर लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ कुछ समय के लिए डर का माहौल भी बन गया। सूचना मिलने के बाद स्थानीय सर्पमित्र को मौके पर बुलाया गया।
ट्रक में मिला रंग-बिरंगा फ्लाइंग स्नेक
जानकारी के मुताबिक, धरमजयगढ़ से एक ट्रक कोरबा पहुंचा था। इसी दौरान ट्रक के अंदर एक खूबसूरत और अलग तरह का सांप दिखाई दिया। सांप का रंग और बनावट सामान्य तौर पर दिखाई देने वाले सांपों से अलग नजर आई। इसके बाद इसकी पहचान फ्लाइंग स्नेक के तौर पर की गई। सांप को देखने के लिए आसपास के लोगों की भीड़ जुटने लगी और इसकी तस्वीरें चर्चा का विषय बन गईं।
सर्पमित्र ने सुरक्षित तरीके से किया रेस्क्यू
सांप मिलने की सूचना मिलते ही सर्पमित्र मौके पर पहुंचे। उन्होंने सावधानीपूर्वक सांप को पकड़ा और उसे सुरक्षित तरीके से ट्रक से बाहर निकाला। रेस्क्यू के दौरान सांप को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखा गया। सांप के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इस घटना ने एक बार फिर कोरबा और आसपास के क्षेत्रों में मौजूद जैव विविधता की ओर लोगों का ध्यान खींचा है।
छत्तीसगढ़ में सांपों की कई प्रजातियां मौजूद
छत्तीसगढ़ को सांपों और अन्य सरीसृपों की विविधता के लिए भी जाना जाता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, राज्य में सांपों की करीब 44 से 75 प्रजातियां पाई जाती हैं। सांपों और सरीसृपों पर आधारित फील्ड गाइड में छत्तीसगढ़ में करीब 75 पुष्ट प्रजातियों के दर्ज होने की जानकारी मिलती है। वहीं, ऑनलाइन उपलब्ध डेटा और विभिन्न चेकलिस्ट में लगभग 44 प्रजातियों के सांपों का प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है।
जशपुर का तपकरा और फरसाबहार कहलाता है नागलोक
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला सांपों की विविधता के लिए खास पहचान रखता है। जिले के तपकरा और फरसाबहार इलाके में सांपों की बड़ी संख्या और अलग-अलग प्रजातियां पाई जाती हैं। इसी वजह से जशपुर के इन क्षेत्रों को अक्सर ‘नागलोक’ के नाम से भी जाना जाता है। जानकारी के अनुसार, इन इलाकों में करीब 29 से 30 प्रकार की सांप प्रजातियां पाई जाती हैं।
राज्य में मिलते हैं कई जहरीले सांप
छत्तीसगढ़ में जहरीले सांपों की भी कई प्रजातियां मौजूद हैं। यहां भारत के सबसे जहरीले माने जाने वाले ‘बिग फोर’ में शामिल इंडियन कोबरा, कॉमन करैत और रसेल वाइपर जैसी प्रजातियां पाई जाती हैं। इसके अलावा राज्य में किंग कोबरा और पिट वाइपर जैसी प्रजातियों की मौजूदगी भी दर्ज की गई है। ऐसे में ग्रामीण और वन क्षेत्रों में सांपों के प्रति सावधानी बरतना बेहद जरूरी माना जाता है।
फ्लाइंग स्नेक ने बढ़ाई लोगों की उत्सुकता
कोरबा में फ्लाइंग स्नेक का मिलना स्थानीय लोगों के लिए खास अनुभव रहा। हालांकि इसे आम बोलचाल में ‘उड़ने वाला सांप’ कहा जाता है, लेकिन यह वास्तव में हवा में पक्षियों की तरह उड़ता नहीं है। यह पेड़ों से छलांग लगाकर अपने शरीर को चपटा करते हुए हवा में ग्लाइड कर सकता है। यही खासियत इसे अन्य सांपों से अलग बनाती है। ट्रक के जरिए यह सांप धरमजयगढ़ से कोरबा कैसे पहुंचा, इसे लेकर भी लोगों में उत्सुकता बनी हुई है।
सुरक्षित रेस्क्यू से टली संभावित परेशानी
सर्पमित्र की तत्परता से सांप को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया गया। इस घटना ने लोगों को यह भी संदेश दिया कि सांप दिखने पर घबराने या उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय विशेषज्ञ या प्रशिक्षित सर्पमित्र की मदद लेनी चाहिए। कोरबा में सामने आया यह मामला क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का एक और उदाहरण है और दुर्लभ प्रजातियों के संरक्षण की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
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