Iran US Tension: 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य टकराव का असर खाड़ी क्षेत्र में भी दिखाई दे रहा है। इसी बीच ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधे चेतावनी देते हुए कहा है कि वॉशिंगटन को अब यह समझ लेना चाहिए कि उसके खिलाफ युद्ध के नियम बदल चुके हैं। तेहरान ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ईरान की ओर से होने वाला जवाब पहले की तुलना में ज्यादा तेज, भारी और नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।
ईरानी संसद अध्यक्ष ने अमेरिका को दिया सीधा संदेश
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने रविवार को टेलीग्राम पर एक वीडियो जारी कर अमेरिका को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान के हितों और राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ होने वाले किसी भी हमले का जवाब अब पहले से अधिक तेजी और ताकत के साथ दिया जाएगा। गालिबाफ ने अमेरिका से कहा कि उसे इस बदलती स्थिति को बहुत देर होने से पहले समझ लेना चाहिए। उनके बयान को दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
तीन ईरानी तेल टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई
ईरान की यह कड़ी प्रतिक्रिया अमेरिका की ओर से खाड़ी क्षेत्र में तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के एक दिन बाद सामने आई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM के अनुसार, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने क्षेत्रीय जल में गश्त कर रहे दो अमेरिकी नौसैनिक जहाजों की ओर कई मिसाइलें दागीं। अमेरिका ने इन हमलों को बिना उकसावे वाला बताया।
अमेरिकी जहाजों ने मिसाइल हमलों से किया बचाव
CENTCOM के मुताबिक, अमेरिकी नौसैनिक जहाजों ने ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों का सफलतापूर्वक बचाव किया। अमेरिकी पक्ष ने दावा किया कि इस घटना में किसी भी अमेरिकी सैनिक या कर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा। इसके बाद अमेरिकी सेना ने कार्रवाई करते हुए तीन ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी ईरान को कड़ा संदेश दिया।
अमेरिका ने कहा, सैनिकों की सुरक्षा से समझौता नहीं
एडमिरल ब्रैड कूपर ने चेतावनी दी कि अमेरिका अपने सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में किसी तरह की हिचक नहीं दिखाएगा। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ईरान के सीमित और आसानी से निशाना बनाए जा सकने वाले तेल बेड़े को नष्ट किया जा सकता है। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान ने अमेरिकी पोत को निशाना बनाने का किया दावा
इस बीच ईरान के सरकारी मीडिया ने रविवार को दावा किया कि एक अमेरिकी पोत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। ईरानी पक्ष के अनुसार, उसके बलों ने इस पोत को निशाना बनाया। हालांकि, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के इस दावे की पुष्टि नहीं की है। ऐसे में इस घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर बना हुआ है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना टकराव का सबसे संवेदनशील केंद्र
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा तनाव में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद अहम मुद्दा बन चुका है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां किसी भी तरह का सैन्य टकराव या आवाजाही में बाधा अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों को प्रभावित कर सकती है। यही वजह है कि क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
आर्थिक दबाव भी बढ़ा रहा ट्रंप प्रशासन
सैन्य टकराव के अलावा अमेरिका ईरान पर आर्थिक दबाव भी लगातार बढ़ा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने ‘Operation Economic Outcast’ शुरू किया है, जिसका उद्देश्य ईरानी अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण वित्तीय जीवनरेखाओं पर दबाव बनाना बताया गया है। ऐसे में खाड़ी में टैंकरों पर अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की कड़ी जवाबी चेतावनी ने दोनों देशों के बीच तनाव को फिर गंभीर स्तर पर पहुंचा दिया है।
Read More : China Masters 2026: चीन को घर में हराकर सात्विक-चिराग ने रचा इतिहास, पहली बार जीता खिताब