CG Freedom of Religion Bill 2026
CG Freedom of Religion Bill 2026 : छत्तीसगढ़ में प्रस्तावित धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 को लेकर सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जहाँ एक ओर मसीही समाज इस कानून के प्रावधानों को लेकर अपनी कड़ी नाराजगी जता रहा है, वहीं दूसरी ओर बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे पर सीधा और तीखा प्रहार किया है। कोरबा पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब राज्य में धर्मांतरण का खेल नहीं चलेगा और जो लोग राह भटक गए हैं, उनकी ससम्मान घर वापसी कराई जाएगी।
कोरबा के ढपढप में आयोजित पांच दिवसीय हनुमंत कथा के पहले दिन श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मंच से संबोधित करते हुए पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने मिशनरियों की सक्रियता पर निशाना साधा। उन्होंने अपने चिर-परिचित अंदाज में कहा, “यहाँ आसपास हालेलुया वाले भी रहते हैं, उनकी अब ठठरी मारी जाएगी।” उन्होंने कड़ा संदेश देते हुए कहा कि अब हिंदुओं का धर्मांतरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शास्त्री ने विशेष रूप से कोरबा, रायगढ़, जशपुर और बिलासपुर के हिंदुओं से आह्वान किया कि जो लोग किसी कारणवश दूसरे धर्म में चले गए हैं, उनके लिए घर वापसी का यह सबसे सही समय है।
कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने छत्तीसगढ़ की जनता से अपना आत्मीय संबंध भी साझा किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “यह माता कौशल्या की पावन धरती है और भगवान राम का ननिहाल होने के नाते मैं यहाँ का भांचा हूँ।” उन्होंने चुटकी लेते हुए कोरबा के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि अगर कोरबा के लोग कोयला देना बंद कर दें, तो पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में अंधेरा छा जाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ को अपनी शक्ति का केंद्र बताते हुए यहाँ के लोगों पर अपना पूरा अधिकार जताया।
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लाए गए इस नए विधेयक का उद्देश्य अवैध और जबरन धर्मांतरण पर पूरी तरह रोक लगाना है। इस कानून के तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए बेहद कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति लालच, डर या धोखे से किसी का धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसे 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना भरना पड़ सकता है। यह कानून विशेष रूप से कमजोर वर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि पीड़ित व्यक्ति नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से संबंधित है, तो सजा और भी कठोर होगी। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर सजा को बढ़ाकर 10 से 20 साल तक की जेल किया जा सकता है, साथ ही न्यूनतम 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन वर्गों को अक्सर निशाना बनाया जाता है, इसलिए इनके लिए अतिरिक्त सुरक्षा अनिवार्य है।
इस विधेयक का सबसे सख्त हिस्सा सामूहिक धर्मांतरण से जुड़ा है। यदि किसी एक ही घटना में दो या दो से अधिक व्यक्तियों का अवैध तरीके से धर्मांतरण कराया जाता है, तो उसे ‘सामूहिक धर्मांतरण’ की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे मामलों में दोषियों को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही, कम से कम 25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा। मसीही समाज इन्हीं कड़े प्रावधानों को “दमनकारी” बताते हुए विरोध कर रहा है, जबकि हिंदू संगठन इसे अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं।
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