Chaitanya Baghel news : छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। शुक्रवार को रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश करने के बाद उन्हें 5 दिन की रिमांड पर भेजा गया। उन पर शराब, कोल और महादेव ऐप घोटालों से जुड़े हवाला नेटवर्क के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने के आरोप हैं।
ED ने 10 मार्च 2025 को रायपुर, भिलाई और बस्तर में पप्पू बंसल, विजय अग्रवाल और अन्य कारोबारियों के ठिकानों पर रेड की थी। इस दौरान पेन ड्राइव और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस जब्त की गई थीं। पूछताछ में इन कारोबारियों ने चैतन्य को फंड ट्रांसफर करने की बात मानी। बाद में इनपुट्स और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर 18 जुलाई को चैतन्य को गिरफ्तार किया गया।
ED को छापे के दौरान पेन ड्राइव और दस्तावेजों से पता चला कि करोड़ों रुपए की रकम चैतन्य बघेल तक बंसल और अग्रवाल जैसे व्यापारियों के माध्यम से पहुंचाई गई। ये रकम हवाला कारोबारियों के जरिए विभिन्न राज्यों में निवेश की गई थी।
ED की टीम ने जिन होटल कारोबारियों पर रेड मारी, उनमें से एक कारोबारी महादेव ऐप के खजांची की शादी में शामिल हुआ था। उसी कारोबारी ने चैतन्य के महादेव ऐप से लिंक की जानकारी दी। इसी खुलासे के बाद चैतन्य पर कार्रवाई तेज हुई।
चैतन्य का नाम 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी सामने आया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया था कि चैतन्य ने कांग्रेस सरकार के दौरान ‘सुपर सीएम’ की भूमिका निभाई और व्यापारिक नेटवर्क का संचालन किया। पीएम ने कहा था, “चैतन्य के कारण मुख्यमंत्री के दोबारा चुनाव जीतने की स्थिति भी बिगड़ गई थी।”
सूत्रों के अनुसार, चैतन्य ने रायपुर के महर्षि विद्या मंदिर से स्कूलिंग की और भिलाई से बीकॉम और एमबीए किया। वे रियल एस्टेट कारोबार में सक्रिय हैं और विट्ठलपुरम व विट्ठलग्रीन्स नाम की दो टाउनशिप बना चुके हैं। हालांकि, राजनीति में उनकी एंट्री योजनाओं तक सीमित रही। पाटन सीट से चुनाव की चर्चा तो हुई, पर हालात अनुकूल नहीं रहे।
चैतन्य का नाम जुलाई 2024 में प्रोफेसर विनोद शर्मा पर हुए हमले के केस में भी आया था। हालांकि, तब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब ED की जांच में उनका नाम सीधे घोटालों से जुड़ गया है, जिससे कानूनी संकट गहरा हो गया है।
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी से भूपेश बघेल और कांग्रेस पार्टी पर दबाव और बढ़ गया है। जहां एक तरफ ईडी ने मजबूत साक्ष्य पेश किए हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता सकता है। फिलहाल, नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ED की रिमांड में आगे और क्या खुलासे होते हैं।
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