अयोध्या स्थित Champat Rai से जुड़े जमीन खरीद मामले में अब SIT जांच तेज होने की बात सामने आई है। ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन को लेकर उठे सवालों के बाद पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
अयोध्या स्थित Champat Rai से जुड़े जमीन खरीद मामले में अब SIT जांच तेज होने की बात सामने आई है। ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीन को लेकर उठे सवालों के बाद पूछताछ की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।

Champat Rai News : अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी और जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अब अपनी जांच का दायरा व्यापक करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के शीर्ष पदाधिकारियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रस्टी अनिल मिश्रा और गोपाल राव से हुई विस्तृत पूछताछ के बाद, अब एसआईटी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भी पूछताछ करने की तैयारी में है। जांच का मुख्य केंद्र ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई जमीनों के सौदे हैं, जहां कई जमीनों के लिए बाजार मूल्य से कई गुना अधिक भुगतान किए जाने के आरोप लगे हैं। एसआईटी इन महंगे सौदों के पीछे की वास्तविक वजह और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर चंपत राय से स्पष्टीकरण मांगेगी।


राम मंदिर चढ़ावा चोरी कांड ने केवल पुलिस प्रशासन के सामने चुनौतियां खड़ी की हैं, बल्कि मंदिर ट्रस्ट के भीतर भी गहरी दरारें डाल दी हैं। जिस ट्रस्ट पर भगवान की तिजोरी और मंदिर की गरिमा की रक्षा का दायित्व था, उसके सदस्य अब एक-दूसरे पर सार्वजनिक रूप से आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने स्पष्ट रूप से व्यवस्थापक गोपाल राव को इस पूरी व्यवस्थागत विफलता का जिम्मेदार ठहराया है। वहीं, महंत कमल नयन दास ने ट्रस्ट के कई पदाधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस बीच, चंपत राय ने बचाव करते हुए कहा है कि उन्हें टिन्नू यादव ने धोखा दिया है और वे इस कलंक को लेकर अयोध्या नहीं छोड़ेंगे। ट्रस्ट के भीतर इस तरह के विरोधाभासी बयानों से भक्तों की आस्था और ट्रस्ट की साख पर गहरा असर पड़ा है।

घटना के 26 दिन बीत जाने के बाद भी ट्रस्ट की ओर से न तो कोई आधिकारिक बैठक बुलाई गई है और न ही प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए स्थिति को स्पष्ट किया गया है, जिससे संशय का माहौल बना हुआ है। एसआईटी ने अपने दूसरे चरण की जांच में अब गति पकड़ ली है। टीम मंदिर परिसर से जुड़े दस्तावेजों की गहन जांच कर रही है और जमीन खरीद के हर पहलुओं को खंगाल रही है। मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला को 24 घंटे की पुलिस रिमांड मिलने के बाद अब जांच टीम उससे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और चोरी की रकम के पूरे गणित को समझने का प्रयास कर रही है। एसआईटी को जांच पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय मिला है, जिसमें वे आरोपियों के खिलाफ अदालत में पेश करने के लिए ठोस सबूत जुटाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इस पूरे प्रकरण में प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ अब राजनीतिक और कानूनी दबाव भी बढ़ता जा रहा है। अयोध्या के स्थानीय वकीलों ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। वकीलों का तर्क है कि मामला करोड़ों के चढ़ावे और जमीन से जुड़ा है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच केवल एक केंद्रीय एजेंसी ही कर सकती है। इस बीच, चर्चाएं यह भी हैं कि चोरी के आरोपियों और उनके संरक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए प्रशासन उनके ठिकानों पर बुलडोजर भी चला सकता है। अयोध्या पुलिस और एसआईटी जिस तरह से सक्रिय हुई हैं, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में राम मंदिर ट्रस्ट के कई बड़े नामों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पूरे देश की निगाहें अब एसआईटी की रिपोर्ट और आरोपियों के खिलाफ होने वाली अगली बड़ी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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