छत्तीसगढ़

अवैध ईंट भट्ठों का गढ़ बनता जा रहा है चनवारीडाड़ और चौघड़ा क्षेत्र, खनिज विभाग मौन

  • ट्रैक्टर भर ईंट की कीमत 4500 से 5500 रुपये, खनिज विभाग खामोश

मनेन्द्रगढ़@thetarget365: जिले के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण क्षेत्र चनवारीडाड़ और चौघड़ा में इन दिनों अवैध ईंट भट्ठों का संचालन बड़े पैमाने पर हो रहा है। बिना किसी अनुमति और नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए कई जगहों पर ईंट भट्ठे संचालित हो रहे हैं, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन तो हो ही रहा है, साथ ही पर्यावरण पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों की मानें तो इन भट्ठों में बिना रॉयल्टी चुकाए मिट्टी की खुदाई की जा रही है, और शासन की आंखों के सामने यह सारा खेल खुलेआम चल रहा है। खास बात यह है कि खनिज विभाग की पूरी तरह चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग को जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है।

प्रदूषण, जलस्तर में गिरावट और कृषि भूमि की बर्बादी जैसी समस्याएं अब धीरे-धीरे सामने आने लगी हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इन अवैध ईंट भट्ठों पर सख्त कार्रवाई की जाए और क्षेत्र को पर्यावरणीय नुकसान से बचाया जाए।

यदि जल्द ही इन अवैध गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम पूरे क्षेत्र को भुगतने पड़ सकते हैं।

चनवारीडाड़ में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार चरम पर, ट्रैक्टर भर ईंट की कीमत 4500 से 5500 रुपये, खनिज विभाग खामोश

जिले के ग्रामीण अंचल चनवारीडाड़ में अवैध ईंट भट्ठों का संचालन दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। बिना किसी वैध अनुमति के चल रहे इन भट्ठों से भारी मात्रा में ईंटों का निर्माण किया जा रहा है और ट्रैक्टर भर ईंटें 4500 से 5500 रुपये में खुलेआम बेची जा रही हैं।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, ये ईंट भट्ठे बिना रॉयल्टी और पर्यावरणीय स्वीकृति के संचालित हो रहे हैं। मिट्टी की अंधाधुंध खुदाई से न केवल कृषि योग्य भूमि बर्बाद हो रही है, बल्कि क्षेत्र के जलस्तर और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इसके बावजूद खनिज विभाग पूरी तरह मौन है और अब तक किसी भी तरह की ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ प्रभावशाली लोगों की शह पर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। शासन-प्रशासन को इसकी जानकारी होने के बावजूद कोई रोकथाम नहीं की जा रही, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है, ताकि क्षेत्र में फैल रहे इस अवैध कारोबार पर लगाम लगाई जा सके और प्राकृतिक संसाधनों को बचाया जा सके।

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