Chemical Free Ridge Gourd : आजकल बाजार से सब्जियां खरीदते समय उनकी साफ-सफाई और खेती में इस्तेमाल किए गए रसायनों को लेकर कई लोगों के मन में सवाल रहते हैं। खासतौर पर बरसात के मौसम में मिलने वाली तोरई को लेकर भी उपभोक्ता सावधानी बरतते हैं। ऐसे में अगर आपके पास छत, बालकनी या आंगन में थोड़ी जगह है तो आप घर पर ही तोरई की बेल उगा सकते हैं। इससे ताजी सब्जी घर पर उपलब्ध हो सकती है।
घर पर तोरई उगाने के लिए कितनी जगह जरूरी?
तोरई बेल वाली सब्जी है और इसे उगाने के लिए बहुत बड़े खेत की जरूरत नहीं होती। आप इसे 12 से 15 इंच के गमले या ग्रो बैग में आसानी से लगा सकते हैं। गमले के नीचे पानी निकासी के लिए पर्याप्त छेद होना जरूरी है। इससे अतिरिक्त पानी बाहर निकलता रहेगा और मिट्टी में जलभराव की स्थिति बनने से जड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका कम होगी।
मिट्टी तैयार करने का आसान तरीका
तोरई के पौधे के लिए ऐसी मिट्टी तैयार करें जिसमें सामान्य बगीचे की मिट्टी के साथ अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाई गई हो। दोनों को लगभग बराबर मात्रा में मिलाया जा सकता है। मिट्टी में थोड़ी नीम खली भी मिलाने से जैविक तरीके से मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके बाद अच्छी गुणवत्ता वाले तोरई के बीज का चयन करें।
बीज बोने से पहले करें यह जरूरी काम
तोरई के बीजों को सीधे मिट्टी में लगाने के बजाय उन्हें करीब 6 से 8 घंटे पानी में भिगोकर रखना उपयोगी हो सकता है। इससे बीजों को अंकुरण के लिए नमी मिलने में मदद मिलती है। तैयार गमले में 2 से 3 बीज लगभग एक इंच गहराई पर डालें और ऊपर से हल्का पानी दें। उचित नमी और अनुकूल मौसम मिलने पर कुछ दिनों में पौधे निकलने लगते हैं।
बेल को बढ़ने के लिए दें मजबूत सहारा
तोरई का पौधा जैसे-जैसे बड़ा होता है, उसकी बेल फैलने लगती है। इसलिए पौधे के पास मजबूत डंडा, रस्सी या तार लगाकर मचान तैयार करना जरूरी है। बेल को ऊपर चढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिलने से पौधे का विकास बेहतर हो सकता है। गमले को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां रोजाना करीब 5 से 6 घंटे पर्याप्त धूप मिल सके।
पानी और खाद का रखें सही संतुलन
तोरई के पौधे को पानी देते समय मिट्टी की नमी का ध्यान रखना जरूरी है। मौसम और तापमान के अनुसार सिंचाई की जरूरत बदल सकती है। मिट्टी सूखने लगे तो पानी दें, लेकिन गमले में पानी जमा न होने दें। पौधे के पोषण के लिए रासायनिक खाद की जगह अच्छी तरह तैयार जैविक खाद या कंपोस्ट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
कीट लगने पर अपनाएं सुरक्षित घरेलू उपाय
अगर तोरई की बेल पर कीड़े या इल्लियां दिखाई दें तो सबसे पहले प्रभावित पत्तियों और बेल का निरीक्षण करें। छोटे स्तर के प्रकोप में नीम आधारित घरेलू घोल या बाजार में उपलब्ध जैविक कीट नियंत्रण उत्पादों का इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी भी स्प्रे का प्रयोग करने से पहले उसकी मात्रा और उपयोग संबंधी निर्देश जरूर पढ़ें, खासकर यदि फल तोड़कर खाने वाले हों।
फूल आने के बाद कैसे बढ़ाएं फल उत्पादन?
तोरई की बेल पर नर और मादा दोनों प्रकार के फूल आते हैं। कई बार प्राकृतिक परागण पर्याप्त नहीं होने पर फल बनने में कमी दिखाई दे सकती है। ऐसी स्थिति में नर फूल से पराग लेकर मादा फूल तक हल्के हाथ से पहुंचाने जैसी कृत्रिम परागण प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। नियमित निगरानी से पौधे पर बनने वाले फूलों और फलों की स्थिति का पता चलता रहता है।
सही समय पर तोड़ें ताजी और नरम तोरई
तोरई को बहुत ज्यादा बड़ा होने से पहले तोड़ना बेहतर माना जाता है। जब फल करीब 8 से 10 इंच का हो और पर्याप्त कोमल दिखाई दे, तब उसकी तुड़ाई की जा सकती है। ज्यादा पकने पर तोरई का अंदरूनी हिस्सा सख्त और रेशेदार हो सकता है। इस तरह गमले में थोड़ी जगह, उचित धूप, नियमित देखभाल और सही सिंचाई के साथ घर पर ताजी तोरई उगाई जा सकती है।
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