France Gen Alpha Protest : फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों का असंतोष अब बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया है। राजधानी पेरिस के आसपास शुरू हुआ हाईस्कूल छात्रों का आंदोलन तेजी से देश के कई हिस्सों तक फैल गया है। छात्र शिक्षकों की कमी, भीड़भरी कक्षाओं, स्कूलों की खराब स्थिति और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं को लेकर सड़कों पर उतर रहे हैं। 29 सितंबर को देशभर में 400 से अधिक स्कूलों के प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई थी, जबकि बाद में 356 स्कूलों में कम से कम आंशिक नाकेबंदी दर्ज की गई।
15 से 18 साल के Lycée छात्र आंदोलन की अगुवाई में
इस आंदोलन में मुख्य भूमिका फ्रांस के Lycée यानी माध्यमिक शिक्षा के अंतिम चरण में पढ़ने वाले छात्रों की है। इनमें बड़ी संख्या 15 से 18 वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की बताई जा रही है। छात्रों ने सोशल मीडिया के जरिए एक-दूसरे से संपर्क कर स्कूलों की नाकेबंदी और प्रदर्शन आयोजित किए। आंदोलन की शुरुआत पेरिस क्षेत्र के कुछ स्कूलों से हुई थी, लेकिन अब यह देश के कई शहरों तक पहुंच चुका है।
शिक्षकों की कमी और भीड़भरी कक्षाएं बनीं बड़ी वजह
प्रदर्शनकारी छात्रों की प्रमुख शिकायतों में स्कूलों में शिक्षकों की कमी और अनुपस्थित शिक्षकों का समय पर विकल्प नहीं मिलना शामिल है। इसके अलावा छात्रों का कहना है कि कई कक्षाओं में संख्या अधिक होने के कारण पढ़ाई प्रभावित होती है। छात्र स्कूलों में बेहतर संसाधन, भवनों की मरम्मत और सम्मानजनक शिक्षण परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। कुछ इलाकों में छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रवेश प्रक्रिया Parcoursup से जुड़ी पढ़ाई के दबाव को भी मुद्दा बनाया है।
गर्मी और खराब वेंटिलेशन ने बढ़ाई परेशानी
स्कूलों की भौतिक स्थिति भी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। फ्रांस में इस वर्ष अत्यधिक गर्मी के दौरान कई स्कूलों की कक्षाओं में तापमान काफी बढ़ गया था। कुछ स्कूलों में पर्याप्त वेंटिलेशन और गर्मी से बचाव के इंतजाम नहीं होने की शिकायतें सामने आई थीं। मई में प्रकाशित रिपोर्टों में भी कई फ्रांसीसी स्कूलों में गर्म कक्षाओं और अपर्याप्त बुनियादी सुविधाओं को लेकर चिंता जताई गई थी।
कई शहरों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों में झड़प
आंदोलन के दौरान ज्यादातर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कुछ शहरों में कूड़ेदानों में आग लगाने, पुलिस पर वस्तुएं फेंकने और अन्य हिंसक घटनाओं की रिपोर्ट सामने आई। इसके बाद पुलिस ने कुछ जगहों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने की कार्रवाई की।
सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने 29 सितंबर को बताया था कि लगभग 440 लोगों को हिरासत में लिया गया है और इनमें बड़ी संख्या नाबालिगों की थी। हालांकि, बाद की रिपोर्टों में गिरफ्तारियों और प्रभावित स्कूलों के आंकड़े और बढ़ने की जानकारी सामने आई है। 30 सितंबर तक Reuters ने 356 प्रभावित हाईस्कूलों और दो दिनों में 1,000 से अधिक गिरफ्तारियों की जानकारी दी, जबकि स्थिति 1 अक्टूबर को भी जारी रही।
सरकार ने बातचीत और शांति की अपील की
फ्रांसीसी सरकार ने छात्रों की शिक्षा से जुड़ी मांगों को अलग मुद्दा मानते हुए प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की आलोचना की है। शिक्षा मंत्री एडुआर्ड गेफ्रे ने प्रभावित इलाकों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था पर भी जोर दिया। वहीं, सरकार और शिक्षा संगठनों के बीच बातचीत के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश जारी है।
आंदोलन अब शिक्षा व्यवस्था से आगे बढ़ा
फ्रांस में छात्र आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब सरकार के 2027 बजट को लेकर भी व्यापक विरोध चल रहा है। शिक्षा क्षेत्र में अधिक संसाधन, शिक्षकों की उपलब्धता और बेहतर स्कूल सुविधाओं की मांग अब व्यापक सामाजिक आंदोलन से जुड़ती दिखाई दे रही है। 1 अक्टूबर को करीब 30 विश्वविद्यालय परिसरों के भी विरोध में शामिल होने की रिपोर्ट सामने आई, जिससे आंदोलन का दायरा और बढ़ गया है।
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