CG Budget Session 2026
CG Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र का तीसरा दिन काफी हंगामेदार रहा। सत्तापक्ष के ही वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक ने प्रदेश में फैलते नशे के जाल को लेकर अपनी ही सरकार के प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए। ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से अजय चंद्राकर ने नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और तस्करी का मुद्दा उठाते हुए पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को पूरी तरह असफल करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नशे का कारोबार इस कदर बढ़ गया है कि अब यह युवा पीढ़ी के भविष्य को निगल रहा है। हालांकि, गृहमंत्री विजय शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि सरकार पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है और प्रशासन कतई फेल नहीं हुआ है।
अजय चंद्राकर ने सदन में एम्स (AIIMS) और सामाजिक न्याय मंत्रालय के राष्ट्रीय सर्वेक्षण के चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में नशीले ड्रग्स का सेवन करने वालों की संख्या बढ़कर करीब 2 लाख तक पहुंच गई है, जबकि गांजा पीने वालों का आंकड़ा 4 लाख के करीब है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 10 से 17 साल की उम्र के लगभग 40 हजार बच्चे और किशोर कफ सिरप और अन्य नशीले इन्हेलेंट्स के शिकार हो चुके हैं। चंद्राकर ने दावा किया कि नशे की लत के कारण होने वाले मानसिक तनाव से आत्महत्या की दर में भी बढ़ोतरी हुई है और प्रदेश में इससे होने वाली मृत्यु दर 250 से 300 के बीच है।
बहस के दौरान अजय चंद्राकर ने मैक्सिको के ड्रग माफिया ‘एलमैंचो’ का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि नशा तस्करों का नेटवर्क कितना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने राजधानी रायपुर का जिक्र करते हुए कहा कि यहाँ हर गली-चौराहे पर नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हैं। चंद्राकर ने पुलिस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि जब आरक्षक ही हेरोइन बेचते पकड़े जा रहे हों, तो व्यवस्था पर भरोसा कैसे किया जाए? उन्होंने रायपुर में पकड़े गए गांजा तस्करों का उदाहरण दिया जो हाईटेक कैमरों का इस्तेमाल कर पुलिस की आवाजाही पर नजर रखते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तस्करों के पास तकनीक पुलिस से कहीं ज्यादा उन्नत है।
सदन में चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आई कि अब नशा केवल गलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी फल-फूल रहा है। अजय चंद्राकर ने बताया कि रायपुर, दुर्ग और भिलाई जैसे शहरों में पान की दुकानों से लेकर ऑनलाइन पोर्टल्स तक ‘गोगो स्मोकिंग कोन’, ‘रोलिंग पेपर’, ‘मंकी किंग’ और ‘ग्लास बॉन्ग’ जैसे सामान खुलेआम बेचे जा रहे हैं। बिलासपुर जैसे शहरों के हर चौक-चौराहे पर गांजा, नशीले इंजेक्शन और कैप्सूल आसानी से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाना प्रशासन के लिए अब लगभग असंभव होता जा रहा है।
विपक्ष और अपनी ही पार्टी के विधायक के आरोपों का जवाब देते हुए गृहमंत्री विजय शर्मा ने कड़े आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि साल 2026 के शुरुआती महीने (31 जनवरी तक) में ही 146 मामलों में 257 आरोपियों को जेल भेजा गया है। साल 2025 में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 बड़े तस्करों की लगभग $13.29$ करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त या फ्रीज किया है। गृहमंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार ने सभी जिलों में टास्क फोर्स का गठन किया है और पुलिस का विशेष अभियान लगातार जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैक्सिको जैसी अराजकता की स्थिति भारत में कभी पैदा नहीं होने दी जाएगी।
नशे पर चर्चा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी मोर्चा संभाला। जब तस्करी पर चर्चा चल रही थी, तभी विषय शराब की ओर मुड़ गया। इस पर गृहमंत्री विजय शर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि “शराब पर चर्चा लंबी है, फिर कभी कर लेंगे। शराब पर बात निकलेगी तो दूर तलक जाएगी।” गृहमंत्री के इस कटाक्ष पर भूपेश बघेल ने कड़े तेवर दिखाते हुए जवाब दिया— “सत्र चल रहा है, चर्चा कितनी भी लंबी हो या कितनी भी दूर जाए, होने दीजिए। आप भागिए मत, चर्चा कराइए।” इस नोकझोंक ने सदन के तापमान को और बढ़ा दिया।
गृहमंत्री ने सदन को विस्तार से जानकारी दी कि साल 2025 में कुल 1288 प्रकरणों में 2342 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान 16,999 किलोग्राम गांजा, भारी मात्रा में ब्राउन शुगर, अफीम, हेरोइन, कोकीन और एमडीएमए (MDMA) जब्त किया गया। वहीं जनवरी 2026 तक ही करीब 3090 किलो गांजा और 59,270 नग नशीली दवाइयां पकड़ी जा चुकी हैं। उन्होंने टिकरापारा में पकड़े गए आरक्षक का जिक्र करते हुए बताया कि उसे एनडीपीएस एक्ट के साथ-साथ आर्म्स एक्ट के तहत भी आरोपी बनाया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि 10 जिलों में ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ (ANTF) के लिए 100 नए पदों को भी स्वीकृति दी गई है।
इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान अजय चंद्राकर ने एक और महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दा उठाया। उन्होंने जोमैटो, स्विगी, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले ‘गिग वर्करों’ के अधिकारों की बात की। उन्होंने पूछा कि क्या सरकार इन श्रमिकों को संगठित मानती है या असंगठित? उन्होंने चिंता जताई कि ’10 मिनट डिलीवरी’ के दबाव में ये युवा अपनी जान जोखिम में डालकर वाहन चलाते हैं, जिससे सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है। जवाब में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में ये वर्कर किसी श्रेणी में नहीं हैं, लेकिन ‘सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020’ के तहत केंद्र सरकार के नियमों के आधार पर राज्य सरकार जल्द ही इनके हितों की रक्षा के लिए कदम उठाएगी।
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