Chhattisgarh Celebration : गुरुवार को छत्तीसगढ़ में राज्य का पहला पारंपरिक त्योहार हरेली पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जहां मुख्यमंत्री निवास में पर्व मनाया, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने रायपुर स्थित आवास पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कृषि औजारों और गौमाता की पूजा की। बच्चों और ग्रामीणों ने गेड़ी चढ़कर त्योहार की खुशी जाहिर की।
हरेली पर्व के मौके पर पत्रकारों से बात करते हुए भूपेश बघेल ने एक बार फिर केंद्र सरकार और ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनके बेटे चैतन्य बघेल को 14 जुलाई को जन्मदिन के दिन बिना किसी नोटिस के उठा लिया गया। उन्होंने इसे “रणनीतिक गिरफ्तारी” बताते हुए कहा, “जिसने मेरे परिवार को जेल भेजा, उसकी सरकार चली गई। अब मोदी ने मेरे बेटे को गिरफ्तार कराया है, देखिए आगे क्या होता है।”
पूर्व सीएम ने कहा, “बचपन से देखा है कि बाबूजी (स्व. नंदकुमार बघेल) जेल जाते थे। वो कहा करते थे—जेल मेरा दूसरा घर है।” उन्होंने दावा किया कि पहले अजीत जोगी सरकार ने उनके पिता को जेल भेजा और वह सरकार गई, फिर रमन सिंह सरकार ने उन्हें जेल भेजा, वह भी सत्ता से बाहर हो गई। अब केंद्र सरकार उनके बेटे को निशाना बना रही है। भूपेश ने कहा, “केवल चैतन्य ही मेरा बेटा नहीं, छत्तीसगढ़ की जनता भी मेरा परिवार है।”
भूपेश बघेल ने भाजपा पर राजनीतिक बदले की भावना से कांग्रेस नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बलौदाबाजार एसपी-कलेक्टर दफ्तर आगजनी मामले में सतनामी समाज के नेताओं और विधायक देवेंद्र यादव को भी जेल भेजा गया। साथ ही बस्तर के वरिष्ठ नेता कवासी लखमा को भी जेल में डालकर बस्तर की आवाज को दबाने की कोशिश की गई।
अपने बयानों के साथ-साथ भूपेश बघेल ने हरेली पर्व की परंपराओं को भी पूरे उल्लास से निभाया। उन्होंने पारंपरिक छत्तीसगढ़ी परिधान में गेड़ी चढ़ी, खेती-बाड़ी के औजारों की पूजा की, और गौमाता को चारा खिलाकर आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ी अस्मिता और लोक संस्कृति का प्रतीक है।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव और कृषि मंत्री टंकाराम वर्मा ने भी अपने-अपने निवास पर पारंपरिक रूप से हरेली पर्व मनाया। साव ने इस मौके पर शीशम का पौधा रोपकर हरियाली का संदेश दिया और कहा कि हरेली उनके बचपन की मधुर यादों से जुड़ा हुआ है। मंत्री वर्मा ने पारंपरिक हल और बैल की पूजा कर किसानों की खुशहाली की कामना की।
छत्तीसगढ़ में हरेली पर्व खासकर किसानों और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ा होता है। इस दिन लोग कृषि यंत्रों, बैलों और पशुओं की पूजा करते हैं। बच्चे गेड़ी चढ़ते हैं, महिलाएं पारंपरिक व्यंजन बनाती हैं और नीम की डंडियों से झाड़ा देने की परंपरा निभाते हैं। इस वर्ष भी पूरे राज्य में गांव से लेकर शहरों तक इस पर्व की रौनक देखने को मिली।
हरेली छत्तीसगढ़ का साल का पहला पारंपरिक पर्व माना जाता है। ‘हरेली’ शब्द ‘हरियाली’ से बना है, जो प्रकृति, कृषि, और पर्यावरण से जुड़ाव को दर्शाता है। यह त्योहार न केवल किसानों की मेहनत का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ी परंपराओं, लोकसंस्कृति और प्रकृति के साथ तालमेल का जीवंत उदाहरण भी है।
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