Chhattisgarh political: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय स्थित महानदी भवन में विभागीय सचिवों और विभागाध्यक्षों के साथ मैराथन बैठक कर शासन-प्रशासन की कार्यशैली में कसावट लाने और “विकसित छत्तीसगढ़” की दिशा में ठोस कदम उठाने का स्पष्ट संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विभागीय समन्वय और टीम भावना के साथ कार्य करने हेतु प्रेरित करते हुए, आमजन से जुड़ी समस्याओं के त्वरित और प्रभावी निराकरण पर विशेष बल दिया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पूंजीगत व्यय से राज्य की आधारभूत संरचना को मजबूती मिलती है और यह दीर्घकालिक विकास की नींव रखता है। उन्होंने पूंजीगत व्यय में अपेक्षित प्रगति नहीं कर पाने वाले विभागों को कार्यों में तेजी लाने और समयबद्ध ढंग से प्रोजेक्ट्स प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के रजत जयंती वर्ष को “अटल निर्माण वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है और इस वर्ष के बजट में बीते वर्ष की तुलना में 18% अधिक प्रावधान किया गया है। ऐसे में यह आवश्यक है कि बजट में शामिल कार्यों को समय पर प्रशासकीय स्वीकृति मिले और उनके टेंडर शीघ्र जारी कर कार्य प्रारंभ कर दिए जाएं।
मुख्यमंत्री ने ई-ऑफिस प्रणाली को शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही का अहम साधन बताते हुए खुशी जताई कि लगभग सभी विभागों में यह प्रणाली लागू हो चुकी है। शेष विभागों को दिसंबर 2025 तक ई-ऑफिस को अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा, “ई-ऑफिस ने शासन को पेपरलेस, तेज और पारदर्शी बनाया है। इससे सुशासन का सपना साकार हो रहा है।”
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे आम जनता की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनें और प्राथमिकता से समाधान करें। उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन की सतत मॉनिटरिंग और नियमित प्रवास से विकास की गति में तेजी आती है।
प्रभारी सचिवों को प्रत्येक दो माह में प्रभार वाले जिलों का दौरा कर योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा करने को कहा गया।
मुख्यमंत्री ने मंत्रालय के कामकाज में अनुशासन लाने के लिए 1 दिसंबर से बायोमैट्रिक अटेंडेंस प्रणाली लागू करने की घोषणा की। उन्होंने अधिकारियों को समय पर कार्यालय आने और अधीनस्थों को भी समयपालन के लिए प्रेरित करने को कहा।
मुख्य सचिव विकास शील ने जानकारी दी कि बायोमैट्रिक प्रणाली उप सचिव स्तर से वरिष्ठ अधिकारियों तक के लिए अनिवार्य होगी।
मुख्यमंत्री साय ने प्रदेश में सुगम आवागमन के लिए सड़कों के सुधार व रखरखाव पर विशेष बल देने को कहा। साथ ही जेम पोर्टल से की जा रही शासकीय खरीदी में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की यह उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक केवल दिशा-निर्देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें जवाबदेही, पारदर्शिता और समयबद्धता की स्पष्ट रूपरेखा तय की गई। शासन-प्रशासन के हर स्तर पर कार्य संस्कृति को सुधारने की दिशा में यह बैठक एक निर्णायक कदम साबित हो सकती है।
छत्तीसगढ़ सरकार का यह प्रयास न केवल विकसित राज्य की दिशा में अग्रसर होने का संकेत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आम जनता की अपेक्षाओं को केंद्र में रखकर योजनाओं को नीतिगत और क्रियान्वयन स्तर पर प्रभावशाली रूप से लागू किया जा रहा है।
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