Dussehra 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के माध्यम से एक भावनात्मक संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने दशहरा के महत्व को रेखांकित करते हुए देश के हर नागरिक को सत्य, साहस और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

विजयादशमी का संदेश: बुराई पर अच्छाई की जीत
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा: “विजयादशमी बुराई और असत्य पर अच्छाई और सत्य की विजय का प्रतीक है। मेरी कामना है कि इस पावन अवसर पर हर किसी को साहस, बुद्धि और भक्ति के मार्ग पर निरंतर अग्रसर रहने की प्रेरणा मिले। देशभर के मेरे परिवारजनों को विजयादशमी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।”

प्रधानमंत्री के इस संदेश में भारतीय संस्कृति की उस गूढ़ परंपरा की झलक दिखाई देती है, जो हमें सिखाती है कि चाहे कितनी भी बड़ी बुराई क्यों न हो, अंततः विजय सच्चाई और सदाचार की ही होती है।
दशहरा: भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक
विजयादशमी भारत के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे देश में उत्साह, श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार दो महान घटनाओं की स्मृति में मनाया जाता है—भगवान श्रीराम द्वारा रावण का वध और देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर का संहार। दोनों घटनाएं इस बात की प्रतीक हैं कि जब समाज में अधर्म, अन्याय और अत्याचार बढ़ता है, तो धर्म, सत्य और न्याय की जीत सुनिश्चित होती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने हमेशा भारतीय त्योहारों और सांस्कृतिक मूल्यों को राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और आत्मबोध से जोड़ने की बात कही है। दशहरा का अवसर भी उन्होंने इसी दिशा में इस्तेमाल किया है, जहाँ उन्होंने न केवल शुभकामनाएं दीं, बल्कि देशवासियों को आत्मबल, विवेक और विश्वास के पथ पर चलने का भी संदेश दिया।
डिजिटल युग में भी सांस्कृतिक जुड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश डिजिटल युग में सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक जागरूकता का बेहतरीन उदाहरण है। आज जब सोशल मीडिया देश की बड़ी आबादी तक सीधा संवाद स्थापित करने का माध्यम बन गया है, ऐसे में प्रधानमंत्री का यह शुभकामना संदेश देश के कोने-कोने तक पहुंचा है और लोगों को पर्व की भावना से जुड़ने का अवसर मिला है।
यह संदेश विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो तकनीक और नवाचार के इस दौर में पारंपरिक मूल्यों और धार्मिक विश्वासों से दूर होते जा रहे हैं। मोदी का यह प्रयास उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।
सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी का विजयादशमी पर यह संदेश केवल धार्मिक या सांस्कृतिक नहीं है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। दशहरा का पर्व हमें जाति, पंथ और भाषा से ऊपर उठकर एकजुट होने का संदेश देता है। यह बुराई के विरुद्ध मिलकर लड़ने और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
मोदी सरकार की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सोच भी इसी मूल भावना से प्रेरित है, जहाँ देश की विविधताओं को एकता के सूत्र में पिरोया जाता है।
विजयादशमी का उत्सव, राष्ट्र के लिए उत्साह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विजयादशमी के अवसर पर दिया गया संदेश न केवल एक औपचारिक शुभकामना है, बल्कि एक गहन सांस्कृतिक और नैतिक प्रेरणा भी है। यह देशवासियों को याद दिलाता है कि हर चुनौती, हर अन्याय और हर संकट के सामने अगर हम सत्य, साहस और भक्ति के मार्ग पर अडिग रहें, तो विजय निश्चित है।
इस पावन पर्व पर प्रधानमंत्री की शुभकामनाएं पूरे देश को एक नई ऊर्जा और उत्साह से भर देती हैं, जो राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और आत्मविश्वास के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।











