CG e-Shram Sathi: छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के लाखों श्रमिकों के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने श्रम विभाग की एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान “ई-श्रम साथी” मोबाइल एप्लिकेशन का भव्य शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह एप केवल एक डिजिटल टूल नहीं है, बल्कि श्रमिकों को सीधे सरकार और रोजगार के अवसरों से जोड़ने वाला एक सशक्त सेतु बनेगा। सरकार का मुख्य विजन यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ फाइलों तक सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े श्रमिक तक पहुंचे।

डिजिटल लेबर चौक: घर बैठे मिलेंगी योजनाएं और रोजगार
“ई-श्रम साथी” एप को छत्तीसगढ़ के ‘डिजिटल लेबर चौक’ के रूप में विकसित किया गया है। इस एप के माध्यम से अब श्रमिकों को काम की तलाश में भटकना नहीं पड़ेगा। इसके जरिए वे रोजगार की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, सरकारी योजनाओं के लिए अपना पंजीकरण करा सकते हैं और सहायता सुविधाओं का लाभ सीधे अपने मोबाइल से उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि श्रमिक प्रदेश की अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं और उनके पसीने का सम्मान करना तथा उनके अधिकारों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
नई श्रम संहिताओं का प्रभावी क्रियान्वयन: सुरक्षा और सम्मान पर जोर
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार द्वारा पारित चार नई श्रम संहिताओं—मजदूरी संहिता 2019, औद्योगिक संबंध संहिता 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा संहिता 2020—के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि छत्तीसगढ़ में इन संहिताओं को इस तरह लागू किया जाए कि श्रमिकों को एक सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण कार्य वातावरण मिल सके। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप, राज्य सरकार अब श्रम क्षेत्र में व्यापक सुधारों की ओर अग्रसर है।
तकनीक आधारित निगरानी: औचक निरीक्षण से पारदर्शिता तक
प्रशासनिक कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री ने तकनीक के अधिकतम उपयोग का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण अब पारंपरिक तरीके के बजाय डिजिटल टूल्स के माध्यम से किया जाए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। सरकार का मानना है कि यदि तकनीक आधारित निगरानी मजबूत होगी, तो श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन रोका जा सकेगा और उन्हें समय पर न्याय मिल सकेगा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे केवल आंकड़ों पर ध्यान न दें, बल्कि जमीनी स्तर पर आए बदलावों का मूल्यांकन करें।
निर्माण श्रमिकों के लिए कल्याणकारी बजट: 315 करोड़ का उपकर प्राप्त
भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की समीक्षा में चौंकाने वाले और उत्साहजनक आंकड़े सामने आए। मंडल के तहत अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं। वर्ष 2025-26 के दौरान सरकार को एक प्रतिशत उपकर (सेस) के रूप में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। उल्लेखनीय है कि मंडल के गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये संग्रहित किए जा चुके हैं, जिनमें से 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं में खर्च किए जा चुके हैं। यह धनराशि सीधे तौर पर श्रमिकों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास के लिए उपयोग की जा रही है।
योजनाओं का जाल: मिनीमाता से लेकर ई-रिक्शा सहायता तक
छत्तीसगढ़ सरकार श्रमिकों के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही है। इनमें प्रमुख रूप से ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’, ‘मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना’ और ‘दीदी ई-रिक्शा सहायता’ शामिल हैं। शिक्षा के क्षेत्र में ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना’ के तहत कक्षा 6वीं में प्रवेश लेने वाले बच्चों की संख्या को 100 से बढ़ाकर 200 कर दिया गया है। इसके अलावा, ई-केवाईसी के माध्यम से अब तक 55 प्रतिशत लाभार्थियों का डिजिटल सत्यापन पूरा हो चुका है, जिससे केवल वास्तविक पात्र लोगों को ही लाभ मिलना सुनिश्चित होगा। “मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र” जैसे नवाचारों को और अधिक प्रभावी बनाने की भी योजना है।


















