Fake Medicine : छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अमानक और नकली दवाओं का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में कॉरपोरेशन द्वारा सप्लाई की जा रही तीन दवाओं के उपयोग और वितरण पर रोक लगा दी गई है। रायपुर दवा गोदाम से इन दवाओं की वापसी के आदेश जारी किए गए हैं।

जिन दवाओं पर लगी रोक
जिन दवाओं के उपयोग पर रोक लगी है, उनमें शामिल हैं:

पेरासिटामोल 650 एमजी, बैच क्रमांक RT 24045, निर्माता: 9M India Limited
पेरासिटामोल 500 एमजी, बैच क्रमांक RT 23547 और RT 240320, निर्माता: 9M Limited
एसिक्लोफेनाक 100 एमजी + पेरासिटामोल 325 एमजी, बैच क्रमांक APC 508, निर्माता: हीलर्स लैब
स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से इन दवाओं की सप्लाई रोक दी है और स्टॉक को गोदाम में वापस मंगाने का आदेश दिया है।
आदेश में देर से कार्रवाई की आशंका
जांच के बाद सामने आया कि इन दवाओं का निर्माण वर्ष 2023-24 में किया गया था और इनकी एक्सपायरी डेट बेहद नजदीक है। विशेषज्ञों का कहना है कि आदेश जानबूझकर देर से जारी किए गए ताकि दवाओं का अधिकतर स्टॉक पहले ही मरीजों को बांटा जा सके और निर्माता कंपनियों को न स्टॉक वापसी करनी पड़े और न ही जुर्माने का सामना करना पड़े। यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी CGMSC द्वारा सप्लाई की गई दर्जनभर से ज्यादा दवाओं और सर्जिकल सामानों पर रोक लग चुकी है। इनमें सर्जिकल ब्लेड, ग्लव्स और कई महत्वपूर्ण दवाएं शामिल रही हैं। इन लगातार घटनाओं से कॉरपोरेशन की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े हो रहे हैं।
मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नकली और अमानक दवाएं न केवल इलाज को बेअसर बना देती हैं, बल्कि मरीजों की जान के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं। पेरासिटामोल जैसी दवाएं आमतौर पर बुखार और दर्द में दी जाती हैं। अगर ये मानक पर खरी नहीं उतरतीं, तो लीवर और किडनी पर गंभीर असर पड़ सकता है।CGMSC की जिम्मेदारी है कि वह राज्यभर के अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को मानक गुणवत्ता की दवाएं उपलब्ध कराए। मगर बार-बार सामने आ रहे अमानक दवाओं के मामले इस संस्था की कार्यप्रणाली और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्वास्थ्य जगत के जानकार इसे केवल लापरवाही नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ मान रहे हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बढ़ी हलचल
लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मचा दी है। विपक्ष ने इसे जनता के स्वास्थ्य के साथ विश्वासघात करार देते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए दवा सप्लाई चेन की पूरी तरह जांच और पारदर्शिता बेहद ज़रूरी है। दोषी कंपनियों पर न केवल जुर्माना बल्कि ब्लैकलिस्टिंग और कानूनी कार्रवाई भी करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो।
आम जनता में बढ़ी चिंता
लगातार नकली और अमानक दवाओं की खबरों ने आम जनता की चिंता और बढ़ा दी है। लोग अब अस्पतालों में मिलने वाली दवाओं की गुणवत्ता को लेकर असमंजस में हैं। सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकारी स्तर पर ही ऐसी गड़बड़ियां हो रही हैं, तो फिर मरीजों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा?










