Fake Transfer Order : छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों और व्याख्याताओं के कथित फर्जी स्थानांतरण आदेश का मामला सामने आने से विभागीय हलचल तेज हो गई है। जानकारी के मुताबिक, 6 अगस्त 2026 की तारीख वाले एक आदेश के जरिए 19 शिक्षक-व्याख्याताओं का तबादला किया गया था। बताया जा रहा है कि संबंधित जिलों में जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) ने इस आदेश के आधार पर कर्मचारियों को नई जगह पदस्थापना भी दे दी। अब आदेश की सत्यता को लेकर जांच शुरू कर दी गई है।
15 जिलों के जिला शिक्षा अधिकारियों से मांगी गई रिपोर्ट
इस मामले में लोक शिक्षण संचालनालय ने संबंधित अधिकारियों को पत्र जारी कर आवश्यक जानकारी और दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, दुर्ग, बेमेतरा, बस्तर, सारंगढ़-बिलाईगढ़, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलरामपुर-रामानुजगंज, राजनांदगांव, उत्तर बस्तर कांकेर, बालोद, कबीरधाम, धमतरी, सरगुजा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के DEO से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि आदेश किस आधार पर जारी हुआ और उसके अनुसार पदस्थापना की प्रक्रिया कैसे पूरी की गई।
लेन-देन की आशंका, शिक्षकों और अधिकारियों से होगी पूछताछ
फर्जी स्थानांतरण आदेश जारी होने के पीछे कथित लेन-देन की आशंका भी जताई जा रही है। इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए आदेश में नाम शामिल शिक्षकों और व्याख्याताओं से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है। जिन अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारियों को नई जगह ज्वाइनिंग दी, उनसे भी जवाब मांगा जा सकता है। हालांकि, फिलहाल किसी व्यक्ति की संलिप्तता आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आदेश कैसे तैयार किया गया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही।
सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार, मामले में संबंधित शासकीय सेवकों की भूमिका की जानकारी जुटाई जा रही है। कुछ अधिकारियों की संभावित मिलीभगत की आशंका भी व्यक्त की गई है। इसके साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरण और प्रतिनियुक्ति से जुड़े अन्य आदेशों की भी जांच किए जाने की संभावना है। यदि जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
प्रतिबंध के बावजूद सैकड़ों स्थानांतरण आदेश जारी होने की चर्चा
विभागीय सूत्रों का दावा है कि स्थानांतरण पर प्रतिबंध के बावजूद पिछले छह महीनों के दौरान लगभग 700 आदेश जारी किए गए। इनमें बड़ी संख्या प्रतिनियुक्ति से संबंधित बताई जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जनजातीय क्षेत्रों से कर्मचारियों को लाकर संयुक्त संचालकों के कार्यालयों में निर्धारित पदों से अधिक संख्या में तैनात किए जाने की शिकायतें भी हैं। इसी अवधि में कथित फर्जी स्थानांतरण आदेश जारी होने का मामला सामने आया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है।
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सरकारी लेटरहेड और अवर सचिव के हस्ताक्षर के दुरुपयोग का आरोप
विभाग के अनुसार, कथित फर्जी आदेश तैयार करने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग के आधिकारिक लेटरहेड का इस्तेमाल किया गया। आदेश में अवर सचिव आर.पी. वर्मा के नाम, पदमुद्रा और हस्ताक्षर के कथित दुरुपयोग की बात भी सामने आई है। दस्तावेज पर आदेश क्रमांक ईएसटीबी 102/755/2026/20-3 और तारीख 6 अगस्त 2026 दर्ज बताई गई है।
जांच रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल विभागीय स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन और संबंधित अधिकारियों से जानकारी जुटाने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण है। तीन दिन में मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आदेश की प्रामाणिकता, ज्वाइनिंग की प्रक्रिया और संभावित अनियमितताओं की पड़ताल की जाएगी। जांच में दोष साबित होने पर नियमानुसार कार्रवाई हो सकती है।
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