Regime Change Controversy : केंद्रीय संसदीय कार्य एवं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के ‘रिजीम चेंज’ संबंधी बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश नहीं है और देश की सरकार का फैसला जनता चुनावों के जरिए करती है। रिजिजू ने विपक्षी नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता का निर्धारण जनता के जनादेश से होता है। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
एक्स पोस्ट में विपक्ष और एक्टिविस्ट पर साधा निशाना
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए रिजिजू ने विपक्षी दलों और एक्टिविस्ट पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है। रिजिजू ने अपने पोस्ट में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि युवा देश को तोड़ने के बजाय उसके निर्माण में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने स्किलिंग, इनोवेशन, स्टार्टअप, टेक्नोलॉजी और खेल जैसे क्षेत्रों में युवाओं की प्रगति को देश की ताकत बताया।
CEC ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद से जुड़ा मामला
रिजिजू की यह टिप्पणी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच आई है। रिपोर्ट के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के बयानों में ‘रिजीम चेंज’ शब्द का उल्लेख किया गया था। ये बयान चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर उठाए जा रहे सवालों के संदर्भ में चर्चा में आए। विपक्षी समूहों ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए हैं।
बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन से तुलना पर विवाद
इस राजनीतिक बहस में बांग्लादेश के छात्र आंदोलन का संदर्भ भी सामने आया है। कुछ छात्र कार्यकर्ताओं ने भारत में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की तुलना बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन से की। बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। हालांकि, भारत की राजनीतिक परिस्थितियों और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष की अलग-अलग दलीलें सामने आ रही हैं। इसी तुलना को लेकर भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर कड़ा हमला बोला है।
तिरंगा मार्च को लेकर भाजपा ने उठाए सवाल
नई दिल्ली में विपक्षी समूहों और नागरिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान तिरंगा मार्च निकाला। भाजपा नेताओं ने इस मार्च की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल राजनीतिक विरोध के लिए किया जा रहा है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने तिरंगा मार्च और ‘हर घर तिरंगा’ जैसे राष्ट्रीय गौरव अभियानों के बीच अंतर बताया। उनका कहना था कि राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और राजनीतिक प्रदर्शन के उद्देश्य को अलग-अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए।
राजनाथ सिंह और प्रदीप भंडारी ने भी विपक्ष को घेरा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस और उसके सहयोगियों पर भारत में बांग्लादेश जैसी राजनीतिक उथल-पुथल पैदा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि युवाओं को अराजक राजनीति का हिस्सा बनाने का प्रयास नहीं होना चाहिए। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश के घटनाक्रम से प्रेरणा लेने की बात लोकतांत्रिक राजनीति के लिहाज से उचित नहीं है।
पी. चिदंबरम ने भाजपा के विरोध पर उठाया सवाल
भाजपा के आरोपों पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा ‘रिजीम चेंज’ शब्द के इस्तेमाल पर इतना विरोध क्यों कर रही है। चिदंबरम के मुताबिक, लोकतंत्र में सरकार बदलना सामान्य प्रक्रिया है। इस तरह ‘रिजीम चेंज’ शब्द को लेकर शुरू हुई बहस अब लोकतंत्र, चुनावी प्रक्रिया और विरोध प्रदर्शनों की भूमिका पर व्यापक राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है।
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