BJP On Rahul Gandhi : छत्तीसगढ़ में फर्जी वोटर के मुद्दे पर सियासी बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कांग्रेस नेताओं के तीखे बयानों के बाद अब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष किरणदेव सिंह ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए देश का समय और संसाधन बर्बाद करने का आरोप लगाया है।

किरणदेव सिंह ने कहा कि राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में फर्जी वोटर को लेकर बड़ा ‘एटम बम’ फोड़ने का दावा किया था। लेकिन जब चुनाव आयोग ने उनसे इस मामले में हलफनामा देने को कहा तो उन्होंने इसे देने से साफ इनकार कर दिया, जिससे उनके आरोप हवा-हवाई साबित हो गए।

राहुल गांधी पर आरोप: संवैधानिक संस्थाओं की अवमानना
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष ने राहुल गांधी के तर्क को हास्यास्पद बताया कि वे सांसद होने के नाते अलग से शपथ पत्र क्यों नहीं देंगे। उन्होंने कहा, “अगर यही तर्क सही है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कही बातों को भी इसी पैमाने पर परखा जाना चाहिए।” उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाकर राजनीतिक लाभ लेने का आरोप लगाते हुए इसे परिपक्व राजनीति न बताया।
बीजेपी ने कांग्रेस से पूछे कई सवाल
किरणदेव सिंह ने कांग्रेस से भी कड़ा सवाल किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार रही है, वहां फर्जी वोटर का आरोप क्यों नहीं उठता? उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, राजस्थान, हिमाचल जैसे राज्यों में कांग्रेस सरकारें थीं, क्या वे भी इसी प्रक्रिया से आई थीं?
उन्होंने यह भी पूछा कि यदि चुनावों में गड़बड़ी थी, तो कांग्रेस ने 99 सीटें जीतकर जश्न क्यों मनाया? वहीं, बिहार में गड़बड़ी पकड़े जाने पर कांग्रेस का विरोध करना और संसद ठप कर देना क्यों उचित था?
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा विवाद
फर्जी वोटर के मामले ने राज्य की राजनीति में नई उथल-पुथल मचा दी है। कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर बीजेपी पर हमलावर है, तो बीजेपी भी जवाबी कार्रवाई में राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं को लगातार निशाने पर ले रही है। इस मामले में चुनाव आयोग ने भी सख्ती दिखाते हुए जांच शुरू कर दी है।
फर्जी वोटर विवाद ने छत्तीसगढ़ की राजनीतिक सियासत को गरमा दिया है। दोनों प्रमुख पार्टियां एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते हुए अपने-अपने पक्ष को सही साबित करने में लगी हैं। इस पूरे प्रकरण का अंत क्या होगा और चुनाव आयोग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है, यह आने वाले समय में साफ होगा। फिलहाल, राजनीतिक गलियारों में यह मुद्दा गर्माहट बरकरार है।
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