Chhattisgarh Liquor Scam : छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले से जुड़े मैनपावर भुगतान मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने सीएसएमसीएल के पूर्व प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी और एजेंसी संचालक बच्छ राज लोहिया उर्फ बीआर लोहिया के खिलाफ पूरक चालान पेश किया है। जांच एजेंसियों का आरोप है कि सरकारी शराब दुकानों के कर्मचारियों के नाम पर अतिरिक्त भुगतान लेकर कथित रूप से कमीशन का नेटवर्क चलाया गया।
पांच एजेंसियों को भुगतान में गड़बड़ी का दावा
जांच के मुताबिक, 2019 से 2023 के बीच पांच मैनपावर एजेंसियों को कुल 182.98 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान हुआ। इसमें ओवरटाइम, बोनस और चार अतिरिक्त दिनों के काम की राशि शामिल थी। एजेंसियों पर आरोप है कि कर्मचारियों को वास्तविक भुगतान किए बिना या उससे अधिक राशि दर्शाकर बिल प्रस्तुत किए गए। संबंधित कर्मचारियों ने भी सामान्य वेतन मिलने, लेकिन अतिरिक्त भुगतान नहीं मिलने की बात कही।
त्रिपाठी के कार्यकाल में 152.39 करोड़ रुपये का भुगतान
जांच एजेंसी के अनुसार, अरुणपति त्रिपाठी मई 2019 से मई 2023 तक सीएसएमसीएल के प्रबंध संचालक रहे। इस अवधि में पांच एजेंसियों को लगभग 152.39 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। इसमें करीब 82.66 करोड़ रुपये ओवरटाइम, 12.21 करोड़ रुपये बोनस, 45.02 करोड़ रुपये अतिरिक्त दिनों के काम और 12.51 करोड़ रुपये सेवा शुल्क के बताए गए हैं। एजेंसी का आरोप है कि इस व्यवस्था से सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
28 से 32 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप
EOW-ACB का दावा है कि एजेंसियों से कथित तौर पर 28 से 32 करोड़ रुपये नकद कमीशन प्राप्त कर अनवर ढेबर तक पहुंचाने की व्यवस्था में त्रिपाठी की भूमिका थी। जांच में सिद्धार्थ सिंघानिया के जरिए नकदी पहुंचाने की बात भी सामने आई है। एजेंसियों के भुगतान, गवाहों के बयान और वित्तीय दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। ये आरोप हैं, जिनका अंतिम निर्धारण न्यायालय में होगा।
ईगल हंटर और अलर्ट कमांडोज को मिले 48 करोड़ रुपये
पूरक चालान के मुताबिक, बीआर लोहिया से जुड़ी ईगल हंटर सॉल्यूशन लिमिटेड और अलर्ट कमांडोज प्राइवेट लिमिटेड को कुल 48.08 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि कर्मचारियों के ओवरटाइम और अतिरिक्त दिनों के काम के बिल तैयार कराए गए, लेकिन संबंधित कर्मचारियों को राशि नहीं मिली। एजेंसियों के अनुसार, दोनों कंपनियों के भुगतान अभिलेख और कमीशन से जुड़े वित्तीय विवरण महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं।
28.80 लाख रुपये के कथित कमीशन का मामला
जांच में अक्टूबर 2023 के लंबित बिलों को पारित कराने के बदले कथित कमीशन दिए जाने का मामला भी शामिल है। एजेंसी के अनुसार, 29.40 लाख रुपये का चेक रायपुर भेजा गया था। इसमें से 28.80 लाख रुपये कथित कमीशन के लिए अलग किए गए थे। जांच एजेंसी का दावा है कि रकम पहुंचाए जाने से पहले प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई में इसे बरामद किया गया।
आंगड़िया नेटवर्क और नकदी हस्तांतरण की जांच
पूरक चालान में नकदी को मुंबई और हैदराबाद तक पहुंचाने के लिए कथित तौर पर आंगड़िया नेटवर्क के इस्तेमाल का भी उल्लेख है। जांचकर्ताओं ने संबंधित व्यक्तियों के बयान और वित्तीय रिकॉर्ड जुटाए हैं। एजेंसी का कहना है कि इन साक्ष्यों से कथित लेनदेन की कड़ियों की जांच की जा रही है।
पहले 12 आरोपितों के खिलाफ दाखिल हो चुका है चालान
इस मामले में 12 आरोपितों के खिलाफ मई 2026 में पहला चालान पेश किए जाने की जानकारी दी गई है। आगे की जांच में अरुणपति त्रिपाठी और बीआर लोहिया की कथित भूमिका से जुड़े साक्ष्य मिलने के बाद पूरक चालान दाखिल किया गया। EOW-ACB के मुताबिक, बीआर लोहिया को पूछताछ के लिए नोटिस भेजे गए, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। उनके खिलाफ फरारी में चालान पेश किया गया है। अब मामले में आगे की कार्रवाई और आरोपों का निर्धारण अदालत में साक्ष्यों तथा सुनवाई के आधार पर होगा।
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