Jantar Mantar Protest : दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन के प्रमुख केंद्र जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के पुलिस के फैसले पर कानूनी विवाद गहरा गया है। इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति समाप्त करना नागरिकों के शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने और अपनी बात रखने के मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर सकता है। इस मामले ने राजधानी में विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थानों और नागरिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका, मौलिक अधिकारों का दिया हवाला
जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक वकील की ओर से याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होना और अपनी मांगों को सार्वजनिक रूप से उठाना नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हिस्सा है। याचिकाकर्ता ने प्रदर्शन स्थलों से जुड़े फैसले पर सवाल उठाते हुए राजधानी में विरोध दर्ज कराने के लिए पर्याप्त और उपयुक्त स्थान उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई है। याचिका में इस बात पर भी चिंता जताई गई है कि वैकल्पिक स्थलों की उपयुक्तता और उपलब्धता पर पर्याप्त विचार किया गया है या नहीं।
उदय भानु चिब ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) के अध्यक्ष उदय भानु चिब ने भी दिल्ली पुलिस के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने याचिका दाखिल कर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने वाले आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। इस कदम को राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जंतर-मंतर लंबे समय से विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है।
दिल्ली पुलिस के 11 अक्टूबर के आदेश में क्या है?
दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से 11 अक्टूबर को जारी स्थायी आदेश के अनुसार, जंतर-मंतर अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल नहीं होगा। पुलिस ने इसके स्थान पर तीन वैकल्पिक जगहों का उल्लेख किया है। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं। आदेश के मुताबिक, इन तीनों स्थानों पर होने वाले प्रदर्शनों के संचालन के लिए विस्तृत और संशोधित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) अलग से जारी की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत प्रदर्शनों की अनुमति और प्रबंधन की प्रक्रिया को लेकर आगे दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।
वैकल्पिक स्थलों की उपयुक्तता पर याचिका में सवाल
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में विरोध-प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित वैकल्पिक जगहों की उपयुक्तता पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, इनमें से कुछ स्थान दिल्ली के बड़े कूड़ास्थलों यानी लैंडफिल क्षेत्रों के नजदीक हैं, जिससे सार्वजनिक सभाओं के लिए उनकी उपयुक्तता पर चिंता पैदा होती है। याचिका में पूर्व में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में स्वीकार किए जाने का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही रामलीला मैदान को विकल्प बनाने के संबंध में पहले व्यक्त की गई न्यायिक चिंताओं का हवाला दिया गया है।
अब अदालतों के फैसले पर टिकी निगाहें
इस मामले में याचिकाकर्ताओं की कानूनी टीम का नेतृत्व दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता कर सकती हैं। फिलहाल, दोनों अदालतों में दायर याचिकाओं पर आगे की सुनवाई और आदेश महत्वपूर्ण होंगे। अदालतों का रुख यह तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस की नई व्यवस्था जारी रहेगी या उसमें कोई बदलाव होगा।
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