Chhattisgarh liquor scam: झारखंड जेल से लाए गए दो आरोपी, EOW ने तेज की जांच

Chhattisgarh liquor scam : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में झारखंड जेल में बंद अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाकर स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 6 सितंबर तक EOW रिमांड पर भेज दिया गया है। कौन हैं आरोपी और क्या है मामला? अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा, रायपुर स्थित ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर्स हैं। इन पर FL-10 A/B लाइसेंस प्रणाली के दुरुपयोग से करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने घोटाले के पैसों को रिश्तेदारों के बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाने का प्रयास किया। EOW की टीम अब रिमांड के दौरान दोनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहां-कहां पैसा ट्रांसफर हुआ, किन खातों में जमा हुआ और इसमें किन-किन अधिकारियों या राजनेताओं की भूमिका थी। झारखंड में भी सक्रिय था ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’ इस घोटाले की जड़ें केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं। ACB की जांच में यह भी सामने आया है कि झारखंड में भी शराब तंत्र छत्तीसगढ़ मॉडल की तर्ज पर खड़ा किया गया था। इस नेटवर्क का संचालन झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के टेंडर में गड़बड़ी कर किया गया। व्यापारी विधु गुप्ता की एजेंसी ने JSBCL के टेंडर में फर्जी मैनपावर दिखाया और कर्मचारियों के वेतन संबंधी दस्तावेजों में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का भुगतान राज्य सरकार से प्राप्त किया। इस प्रक्रिया में कई फर्जी दस्तावेजों और खातों का उपयोग हुआ। गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि करीब दो महीने पहले ACB ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पहले उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, लेकिन अब मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव EOW सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान कई और नाम सामने आ सकते हैं। अब एजेंसी पैसे के प्रवाह और नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है। संभव है कि आने वाले दिनों में कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और कारोबारियों को भी हिरासत में लिया जाए। छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार झारखंड, फर्जी दस्तावेज़ों, टेंडर घोटालों और बहुस्तरीय भ्रष्टाचार से जुड़ते जा रहे हैं। अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा से पूछताछ इस मामले के कई छिपे हुए पहलुओं को उजागर कर सकती है। अब देखना होगा कि EOW की यह कार्रवाई राज्य की राजनीति और प्रशासन में क्या भूचाल लाती है। Read More  : Chhattisgarh Cabinet Issue : छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति पर मचा सियासी घमासान, कांग्रेस पहुंची हाईकोर्ट

Chhattisgarh liquor scam : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने इस मामले में झारखंड जेल में बंद अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाकर स्थानीय अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 6 सितंबर तक EOW रिमांड पर भेज दिया गया है।

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कौन हैं आरोपी और क्या है मामला?

अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा, रायपुर स्थित ओम साईं बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर्स हैं। इन पर FL-10 A/B लाइसेंस प्रणाली के दुरुपयोग से करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोप है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने घोटाले के पैसों को रिश्तेदारों के बैंक खातों के माध्यम से ठिकाने लगाने का प्रयास किया।

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EOW की टीम अब रिमांड के दौरान दोनों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि कहां-कहां पैसा ट्रांसफर हुआ, किन खातों में जमा हुआ और इसमें किन-किन अधिकारियों या राजनेताओं की भूमिका थी।

झारखंड में भी सक्रिय था ‘छत्तीसगढ़ मॉडल’

इस घोटाले की जड़ें केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं हैं। ACB की जांच में यह भी सामने आया है कि झारखंड में भी शराब तंत्र छत्तीसगढ़ मॉडल की तर्ज पर खड़ा किया गया था। इस नेटवर्क का संचालन झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के टेंडर में गड़बड़ी कर किया गया।

व्यापारी विधु गुप्ता की एजेंसी ने JSBCL के टेंडर में फर्जी मैनपावर दिखाया और कर्मचारियों के वेतन संबंधी दस्तावेजों में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का भुगतान राज्य सरकार से प्राप्त किया। इस प्रक्रिया में कई फर्जी दस्तावेजों और खातों का उपयोग हुआ।

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गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

करीब दो महीने पहले ACB ने दोनों आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब किया था, लेकिन जवाब असंतोषजनक पाए जाने पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पहले उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था, लेकिन अब मामले की गंभीरता को देखते हुए EOW ने पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव

EOW सूत्रों के मुताबिक, यह घोटाला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं है। जांच के दौरान कई और नाम सामने आ सकते हैं। अब एजेंसी पैसे के प्रवाह और नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है। संभव है कि आने वाले दिनों में कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और कारोबारियों को भी हिरासत में लिया जाए।

छत्तीसगढ़ के शराब घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसके तार झारखंड, फर्जी दस्तावेज़ों, टेंडर घोटालों और बहुस्तरीय भ्रष्टाचार से जुड़ते जा रहे हैं। अतुल सिंह और मुकेश मनचंदा से पूछताछ इस मामले के कई छिपे हुए पहलुओं को उजागर कर सकती है। अब देखना होगा कि EOW की यह कार्रवाई राज्य की राजनीति और प्रशासन में क्या भूचाल लाती है।

Read More  : Chhattisgarh Cabinet Issue : छत्तीसगढ़ मंत्रिमंडल में 14वें मंत्री की नियुक्ति पर मचा सियासी घमासान, कांग्रेस पहुंची हाईकोर्ट

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