Chhattisgarh: गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (GPM) जिले के जिला अस्पताल में मानवता को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है। एक प्रसूता महिला का ऑपरेशन के दौरान बनाया गया नग्न वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इस शर्मनाक घटना ने ना केवल मरीज की निजता और मानवाधिकारों का उल्लंघन किया है, बल्कि पूरे स्वास्थ्य विभाग को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

ऑपरेशन थिएटर से वीडियो, अस्पताल के स्टाफ पर शक
जानकारी के मुताबिक, यह वीडियो अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर के अंदर का है, जहां किसी ने महिला की निजता भंग करते हुए उसका वीडियो रिकॉर्ड किया और उसे व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल कर दिया। सवाल यह उठता है कि बाहरी व्यक्ति का OT में प्रवेश प्रतिबंधित है, तो फिर यह वीडियो किसने और कैसे बनाया? प्राथमिक जांच में अस्पताल के किसी अंदरूनी कर्मचारी की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है।

FIR दर्ज, गंभीर धाराओं में मामला
पीड़िता के पति की शिकायत पर गौरेला थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल ने बताया कि वीडियो को शेख सलीम नामक व्यक्ति ने एक व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया था। पुलिस ने आरोपी और अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ आईटी एक्ट की धारा 66, 67A भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79 के तहत गंभीर मामला दर्ज किया है।
अस्पताल प्रशासन की सफाई और जांच
जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र पैकरा ने कहा कि घटना सामने आने के बाद तुरंत एक जांच कमेटी गठित की गई है। वीडियो में मौजूद डिजिटल घड़ी और तारीख के आधार पर उस दिन ड्यूटी पर मौजूद सभी स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना अनुमति OT में मोबाइल फोन का उपयोग सख्त वर्जित है।
निजता का उल्लंघन और मानवाधिकारों पर सवाल
चिकित्सा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि गंभीर नैतिक और संवैधानिक उल्लंघन भी है। ऑपरेशन थिएटर जैसी संवेदनशील जगह पर इस तरह की घटना ने स्वास्थ्य सेवाओं की सुरक्षा और भरोसे पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सोशल मीडिया पर आक्रोश, कड़ी कार्रवाई की मांग
घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। आम नागरिकों से लेकर सामाजिक संगठनों ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों पर तत्काल बर्खास्तगी और गिरफ्तारी की मांग की है।
पुलिस का कहना है कि डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी है और जल्द ही दोषियों को गिरफ्तार कर कानूनी सजा दिलाई जाएगी। यह घटना सिर्फ एक महिला की निजता का हनन नहीं, बल्कि पूरे चिकित्सा तंत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह है। ऐसे अपराधों पर सख्त कार्रवाई से ही स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों का विश्वास बहाल किया जा सकता है।










