Chhattisgarh Paddy Scam
Chhattisgarh Paddy Scam: धान गायब होने पर अनोखा सियासी प्रदर्शन छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों ‘धान और चूहे’ चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। सरकारी गोदामों से भारी मात्रा में धान गायब होने के मामले ने अब एक नाटकीय मोड़ ले लिया है। मंगलवार को दुर्ग जिले में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने राज्य की भाजपा सरकार के खिलाफ एक बेहद अनोखा और प्रतीकात्मक विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में करोड़ों रुपये का धान घोटाला हुआ है, लेकिन सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए चूहों को बलि का बकरा बना रही है। इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सड़क पर उतरकर सरकार की घेराबंदी शुरू कर दी है।
कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन किसी पारंपरिक रैली जैसा नहीं था, बल्कि इसे एक ‘बारात’ की शक्ल दी गई थी। राजीव भवन से शुरू हुई इस ‘चूहों की बारात’ में कार्यकर्ता बाराती बनकर शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों की थाप और बाराती गीतों के बीच कांग्रेसी जमकर नाचते-गाते जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। इस प्रदर्शन का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा वह पिंजरा था, जिसमें जिंदा चूहों को कैद किया गया था। कांग्रेस पदाधिकारियों ने इन चूहों को हाथ में लेकर प्रदर्शन किया और प्रशासन को यह संदेश देने की कोशिश की कि सरकार के तर्क कितने हास्यास्पद हैं।
दुर्ग ग्रामीण जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर के नेतृत्व में जब यह बारात कलेक्ट्रेट पहुंची, तो वहां का माहौल काफी गहमागहमी भरा रहा। कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम से मुलाकात की और उन्हें राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शन के अंत में कांग्रेस नेताओं ने एसडीएम को केवल कागज ही नहीं सौंपे, बल्कि वे जिंदा चूहे भी भेंट किए जिन्हें वे साथ लाए थे। कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि चूंकि सरकार की नजर में धान चोरी के असली अपराधी ये चूहे ही हैं, इसलिए वे इन ‘अपराधियों’ को प्रशासन के हवाले कर रहे हैं।
कांग्रेस ने इस दौरान भ्रष्टाचार के गंभीर आंकड़े पेश किए। जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर ने आरोप लगाया कि कवर्धा जिले में लगभग 7 करोड़ रुपये और महासमुंद जिले में करीब 5 करोड़ रुपये का धान गायब पाया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में धान का गायब होना किसी एक चूहे या जानवर का काम नहीं हो सकता, बल्कि यह सुनियोजित भ्रष्टाचार है। कांग्रेस का दावा है कि ऊंचे पदों पर बैठे लोगों ने धान को ठिकाने लगाया है और अब सरकार अपने चहेते अधिकारियों और भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के लिए चूहों का बहाना बना रही है।
पूर्व विधायक अरुण वोरा और शहर अध्यक्ष धीरज बाकलीवाल ने भी इस दौरान सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने पूछा कि अगर वास्तव में चूहों ने इतना धान खाया है, तो गोदामों की सुरक्षा में तैनात अमला और निगरानी समितियां क्या कर रही थीं? क्या करोड़ों का धान खत्म होने तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी को इसकी भनक नहीं लगी? कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह हास्यास्पद है कि एक आधुनिक व्यवस्था वाली सरकार अपने करोड़ों के नुकसान का ठीकरा बेजुबान जानवरों पर फोड़ रही है।
कांग्रेस ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। पार्टी का कहना है कि वर्तमान जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर उन्हें संदेह है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब कांग्रेस नेताओं के बयानों पर केंद्रीय एजेंसियां (ED और CBI) सक्रिय हो जाती हैं, तो इतने बड़े घोटाले पर वे चुप क्यों हैं? कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं की और इस मामले को दबाने की कोशिश की, तो आने वाले समय में पूरे प्रदेश में इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
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