Chhattisgarh power hike : छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं को अगस्त महीने से अपनी जेब और ढीली करनी पड़ेगी। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने शुक्रवार, 11 जुलाई को नए बिजली दरों की घोषणा की है। आयोग के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 20 पैसे और गैर-घरेलू (कॉमर्शियल) उपभोक्ताओं को 25 पैसे प्रति यूनिट की दर से अधिक भुगतान करना होगा।
नए टैरिफ के ऐलान के तुरंत बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कांग्रेस पार्टी ने इसे आम जनता पर आर्थिक अत्याचार करार दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार आर्थिक कुप्रबंधन का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल रही है। वहीं, बिजली कंपनी और आयोग का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय घाटे की भरपाई के लिए जरूरी था।
बिजली दर में संशोधन की प्रक्रिया 20 जून से प्रारंभ की गई थी। आयोग के अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने उपभोक्ताओं से संवाद और जनसुनवाई के लिए आमंत्रण जारी किया था। जनसुनवाई के दौरान कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया, विशेषकर कांग्रेस के पदाधिकारियों ने आयोग के दफ्तर में प्रदर्शन किया था।
आयोग ने घरेलू उपभोक्ता, व्यावसायिक उपभोक्ता, किसानों और बिजली कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा कर सभी पक्षों की राय जानने के बाद यह दर वृद्धि का निर्णय लिया। आयोग का कहना है कि नई टैरिफ नीति उपभोक्ताओं और बिजली कंपनी दोनों के हितों को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है।
राज्य विद्युत वितरण कंपनी (CSPDCL) ने आयोग को 4550 करोड़ रुपए के घाटे की जानकारी दी थी। कंपनी ने बिजली चोरी, लाइन लॉस और राजस्व वसूली में कमी को इसके लिए जिम्मेदार बताया। कंपनी ने दरों में 20 पैसे प्रति यूनिट वृद्धि का प्रस्ताव पहले ही आयोग को भेज दिया था।
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 65 लाख से अधिक बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें BPL, घरेलू, व्यावसायिक और कृषि उपभोक्ता शामिल हैं। नई दरों का सीधा असर सभी वर्गों पर पड़ेगा, लेकिन गैर-घरेलू उपभोक्ताओं को इसका अधिक प्रभाव झेलना पड़ेगा। घरेलू और कृषि उपभोक्ताओं के लिए बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रखी गई है।
यह इस वर्ष की दूसरी बिजली दर वृद्धि है। इससे पहले जून 2024 में भी बिजली की दरों में संशोधन किया गया था। वर्ष 2023 में विधानसभा चुनाव के चलते बिजली दरों को स्थिर रखा गया था। चुनावी साल होने के कारण सरकार ने दरें नहीं बढ़ाईं थीं।
आयोग के अध्यक्ष हेमंत वर्मा ने कहा कि बिजली कंपनी द्वारा प्रस्तुत घाटे की जानकारी और दर वृद्धि के प्रस्ताव के साथ-साथ उपभोक्ताओं की राय को भी महत्व दिया गया है। जनसुनवाई में मिले फीडबैक के आधार पर टैरिफ का संतुलन तय किया गया है ताकि कंपनी को राहत मिले और उपभोक्ताओं पर अत्यधिक बोझ न पड़े।
बिजली दर में हुई इस वृद्धि से पहले ही महंगाई का सामना कर रही जनता पर और बोझ पड़ेगा। घरेलू उपभोक्ताओं को मासिक बिल में बढ़ोतरी झेलनी पड़ेगी, जबकि छोटे व्यापारी और दुकानदारों को अपनी लागत में भी इजाफा करना पड़ सकता है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि यह फैसला वापस नहीं लिया गया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
बिजली दर बढ़ोतरी के फैसले के बाद अब निगाहें छत्तीसगढ़ सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। विपक्ष की नाराजगी और जनता की चिंताओं के बीच सरकार को यह संतुलन साधना होगा कि वित्तीय घाटा भी कम हो और आम उपभोक्ता की पीड़ा भी न बढ़े।
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