छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Pocso Case: स्कूल में प्रधानपाठक पर छात्राओं से अश्लील हरकतों का आरोप, पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज

Chhattisgarh Pocso Case: राजनांदगांव जिले के मोहबा प्राथमिक स्कूल में एक गंभीर और शर्मनाक घटना ने शिक्षा व्यवस्था की नैतिकता और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल के प्रधानपाठक नेतराम वर्मा पर छात्राओं के साथ अश्लील व्यवहार, आपत्तिजनक फोटो दिखाने और शारीरिक छेड़छाड़ (बैड टच) जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया है। वहीं, पूरे घटनाक्रम को छिपाने और शिकायत न करने के आरोप में सहायक शिक्षक डीसम तिवारी को भी निलंबित किया गया है।

कैसे सामने आया मामला?

घटना का खुलासा तब हुआ, जब कुछ छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया। इस पर परिजनों ने बच्चों से बात की, तो बच्चियों ने बताया कि प्रधानपाठक उन्हें अपने कमरे में बुलाकर अश्लील तस्वीरें दिखाता था और अनुचित तरीके से छूता था। बच्चियों की बात सुनकर परिजन दहल उठे।

6 अगस्त को बुलाई गई पालक समिति की बैठक में यह मुद्दा उठाया गया। इसके बाद 7 अगस्त को बीईओ कार्यालय में लिखित शिकायत दी गई। शिक्षा विभाग ने तत्काल संकुल समन्वयक को जांच सौंपकर रिपोर्ट मंगाई। रिपोर्ट में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए, जिसके बाद दोनों शिक्षकों पर कार्रवाई की गई।

पुलिस ने दर्ज किया केस

चिखली चौकी प्रभारी अरुण नामदेव ने बताया कि प्रधानपाठक नेतराम वर्मा के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी है। पीड़ित छात्राओं के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और स्कूल स्टाफ से भी पूछताछ की जा रही है।

सहायक शिक्षक पर भी कार्रवाई

जांच में सामने आया कि सहायक शिक्षक डीसम तिवारी को इस पूरे मामले की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने न तो विरोध किया और न ही उच्च अधिकारियों को इसकी सूचना दी। इस लापरवाही और चुप्पी को गंभीर मानते हुए उन्हें भी निलंबित कर दिया गया है।

शिक्षा विभाग की छवि पर दाग

इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल विद्यालय की गरिमा, बल्कि पूरे शिक्षा विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर स्कूलों को बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान माना जाता है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले अभिभावकों के मन में अविश्वास और भय पैदा करते हैं।

यह मामला न सिर्फ कानूनी, बल्कि सामाजिक और नैतिक दृष्टि से भी चिंताजनक है। बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूलों में जो दिशानिर्देश और प्रणाली बनाई गई है, उस पर फिर से विचार करने की जरूरत है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए सख्त निगरानी, प्रशिक्षण, और सुनवाई प्रणाली विकसित करे, ताकि स्कूल एक सुरक्षित और विश्वसनीय माहौल बन सके।

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