Sukma Naxal Attack: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से एक बार फिर नक्सली हिंसा की दर्दनाक घटना सामने आई है। नक्सलियों ने केरलापाल थाना क्षेत्र के सिरसट्टी पंचायत अंतर्गत नंदा पारा में दो ग्रामीणों की धारदार हथियार से हत्या कर दी। मृतकों की पहचान पदाम पोज्जा और पदाम देवेंद्र के रूप में हुई है। नक्सलियों ने उन पर पुलिस के लिए मुखबिरी करने का आरोप लगाया है।

पुलिस मुखबिरी का आरोप बना जानलेवा
सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि घटना की सूचना ग्रामीणों के माध्यम से मिली है। पुलिस टीम मौके के लिए रवाना हो चुकी है और शवों की बरामदगी के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है।

नक्सली हिंसा का सिलसिला थमता नहीं
यह घटना ऐसे समय पर सामने आई है जब हाल ही में नक्सलियों द्वारा बीजापुर जिले में भी एक युवक की हत्या की गई थी। 28 अगस्त को 27 वर्षीय सुरेश कोरसा को उसके गांव मनकेली पटेलपारा से अगवा कर अंधेरे में मार डाला गया था। उस पर भी पुलिस को सूचना देने का आरोप लगाया गया था।
शिक्षादूत भी नहीं बचे निशाने से
2025 में नक्सलियों का आतंक शिक्षकों तक भी पहुंच चुका है। अब तक 9 शिक्षादूतों की हत्या हो चुकी है, जिनमें 5 बीजापुर और 4 सुकमा जिले के हैं। सभी मामलों में मुखबिरी का आरोप नक्सलियों ने लगाया है। यह घटनाएं दर्शाती हैं कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में आम नागरिकों के लिए जान का खतरा बना हुआ है।
25 साल में 1820 से ज्यादा हत्याएं
छत्तीसगढ़ के गठन (2000) से लेकर अब तक के 25 वर्षों में नक्सलियों ने बस्तर संभाग में 1820 से ज्यादा हत्याएं की हैं। इनमें आम नागरिकों के साथ जनप्रतिनिधि, शिक्षक और सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा हत्याएं बीजापुर जिले में दर्ज की गई हैं।
सुकमा की ताज़ा घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन आज भी कितना असुरक्षित है। ग्रामीणों पर बार-बार मुखबिरी के नाम पर हिंसा करना नक्सलियों की कायरता को दर्शाता है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के सामने यह एक बड़ी चुनौती है कि आम लोगों की जान-माल की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए।
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