छत्तीसगढ़

Maoist surrender CG: माओवादी संगठनों का काला सच आया सामने, डर और माओवादी विचारधारा से तंग आकर लौटे मुख्यधारा में नक्सल

Maoist surrender CG: छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले से नक्सल उन्मूलन की दिशा में बड़ी खबर सामने आई है। बुधवार को 71 नक्सलियों ने फोर्स के सामने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। सरेंडर करने वालों में 21 महिला माओवादी भी शामिल हैं, जिनमें से कई अपने छोटे बच्चों को साथ लेकर आत्मसमर्पण करने पहुंची थीं।

पहली बार इतने नक्सलियों ने किया एक साथ आत्मसमर्पण

यह पहला मौका है जब दंतेवाड़ा जैसे अति नक्सल प्रभावित जिले में एक साथ इतने नक्सलियों ने सरेंडर किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों ने बताया कि वे अब माओवादी विचारधारा से तंग आ चुके हैं और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए अब शांति और विकास के रास्ते को चुनना चाहते हैं।

माओवादी संगठनों का काला सच आया सामने

सरेंडर करने वालों में प्लाटून नंबर 2 का डिप्टी कमांडर बामन मड़काम भी शामिल है, जिसके सिर पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित था। मड़काम ने बताया कि उसकी प्लाटून की महिला सदस्य हिडमे कारम से शादी हुई थी, लेकिन माओवादी नेतृत्व ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि बच्चे नहीं पैदा किए जा सकते।“शादी के कुछ दिनों बाद ही मुझे जबरन नसबंदी के लिए जंगल में ले जाया गया,”

यह खुलासा माओवादी संगठनों के कठोर और अमानवीय नियमों की ओर इशारा करता है, जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता और परिवार की भावना को पूरी तरह कुचल दिया जाता है।

महिला माओवादियों के चौंकाने वाले खुलासे

सरेंडर करने वाली कई महिला नक्सलियों ने बताया कि माओवादी रणनीति के तहत उन्हें बच्चों के साथ खुफिया काम में लगाया जाता था, क्योंकि महिलाओं और बच्चों पर आसानी से संदेह नहीं किया जाता। उनका मुख्य काम नक्सलियों के लिए खाना-पीना पहुंचाना और सूचना आदान-प्रदान करना था।

उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ इलाके में फोर्स का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है और सुरक्षा बलों द्वारा लगातार नक्सली मारे जा रहे हैं, जिससे उनके भीतर डर और असुरक्षा की भावना गहराती जा रही थी।“हम नहीं चाहते थे कि हम या हमारे बच्चे गोली का शिकार बनें। इसलिए हमने सरेंडर करना ही बेहतर समझा,” — सरेंडर करने वाली महिला माओवादी

आत्मसमर्पण को लेकर प्रशासन सतर्क

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी। इनमें रोजगार, सुरक्षा और पुनर्वास पैकेज शामिल हैं ताकि ये लोग समाज की मुख्यधारा में वापस आकर सम्मानजनक जीवन जी सकें।दंतेवाड़ा में 71 नक्सलियों का आत्मसमर्पण केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि विचारधारा की हार और लोकतंत्र की जीत है। यह साबित करता है कि सरकार की सुरक्षा नीति, फोर्स की रणनीति और पुनर्वास योजनाएं अब असर दिखा रही हैं। यह कदम बाकी नक्सलियों के लिए भी एक संदेश है कि बंदूक छोड़कर समाज के साथ चलना ही सही रास्ता है।

Read More : Mahtari Vandan Yojana:महतारी वंदन योजना में बड़ी राहत, नवंबर में खुल सकता है पोर्टल

Thetarget365

Share
Published by
Thetarget365

Recent Posts

Tamil Nadu Election 2026 : DMK का ‘सुपरस्टार’ घोषणापत्र जारी, महिलाओं को ₹8000 का कूपन और ₹2000 मासिक सहायता का वादा

Tamil Nadu Election 2026 :  तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सियासी पारा अपने चरम…

3 minutes ago

IPL 2026: सुनील नरेन ने रचा इतिहास, कायरन पोलार्ड का ‘महारिकॉर्ड’ तोड़ बने नंबर-1 विदेशी खिलाड़ी

IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के रोमांचक सीजन का आगाज हो चुका है…

6 minutes ago

Radish Farming : मूली की उन्नत खेती से किसान बनें मालामाल: कम लागत और बंपर मुनाफे का मंत्र, मात्र 40 दिनों में होगी कमाई

Radish Farming :  आज के बदलते परिवेश में पारंपरिक खेती के पुराने तौर-तरीकों को पीछे…

31 minutes ago

Ambikapur to Delhi Flight : दशकों का इंतजार खत्म! अंबिकापुर से दिल्ली-कोलकाता की पहली उड़ान कल, जानें टाइमिंग

Ambikapur to Delhi Flight :  उत्तर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के लिए 30 मार्च 2026…

38 minutes ago

This website uses cookies.