Child Asthma : अस्थमा बच्चों में होने वाली एक बेहद आम लेकिन गंभीर श्वसन संबंधी बीमारी है। इस बीमारी में बच्चे की सांस लेने वाली नलियों में सूजन आ जाती है, जिसकी वजह से उन्हें सांस लेने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान कर ली जाए और इसका सही उपचार शुरू कर दिया जाए, तो बच्चों को इस गंभीर समस्या के बुरे प्रभावों से बचाया जा सकता है। इसलिए देश के हर माता-पिता को अस्थमा के शुरुआती संकेतों के बारे में पूरी जानकारी होना बेहद जरूरी है। इस विषय पर फोर्टिस अस्पताल के जाने-माने विशेषज्ञ डॉक्टर ने बच्चों में नजर आने वाले अस्थमा के प्रमुख लक्षणों के बारे में विस्तार से बताया है।

डॉक्टर प्रशांत सक्सेना द्वारा बताए गए अस्थमा के प्रमुख लक्षण
फोर्टिस अस्पताल के पल्मोनोलॉजी, पल्मोनोलॉजी क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. प्रशांत सक्सेना ने बच्चों में अस्थमा के प्रमुख लक्षणों की पहचान के बारे में खास जानकारियां साझा की हैं। उनके अनुसार, बच्चों में दिखने वाले मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:

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बार-बार खांसी आना: यदि किसी बच्चे को खासतौर पर रात के समय, सुबह तड़के उठने पर या फिर खेलकूद के दौरान बार-बार खांसी की शिकायत होती है, तो यह अस्थमा का एक स्पष्ट संकेत हो सकता है। कई मामलों में केवल सूखी खांसी ही इस बीमारी का सबसे पहला लक्षण बनती है।
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सांस लेते समय सीटी जैसी आवाज: सांस बाहर छोड़ते समय गले या छाती से सीटी जैसी आवाज आना अस्थमा का सबसे आम और मुख्य लक्षण माना जाता है। यह आवाज इसलिए पैदा होती है क्योंकि बच्चों की सांस की नलियां या एयरवेज संकरी हो जाती हैं।
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सांस फूलना: यदि आपका बच्चा सामान्य शारीरिक गतिविधियों को करने के दौरान, दौड़ने पर या फिर सीढ़ियां चढ़ते समय बहुत जल्दी थक जाता है और उसकी सांस तेजी से फूलने लगती है, तो इस स्थिति को भूलकर भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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सीने में जकड़न: बड़े बच्चे अक्सर अपने सीने में भारीपन या जकड़न होने की शिकायत आसानी से कर देते हैं, जबकि छोटे बच्चे बोल नहीं पाते और वे बेचैनी महसूस करके या बार-बार रोकर अपनी इस परेशानी को जाहिर करते हैं।
किन बच्चों को होता है अस्थमा का सबसे अधिक खतरा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि परिवार में माता-पिता या किसी अन्य नजदीकी सदस्य को पहले से ही अस्थमा, किसी प्रकार की एलर्जी या एक्जिमा की समस्या रही हो, तो ऐसी स्थिति में बच्चे के भीतर भी अस्थमा विकसित होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। इसके अलावा हमारे आस-पास मौजूद धूल, मिट्टी, धुएं, पालतू जानवरों के शरीर के बाल, परागकण यानी पोलन ग्रेन्स, तरह-तरह के वायरल संक्रमण और बढ़ता प्रदूषण भी अस्थमा के लक्षणों को और अधिक गंभीर बना सकते हैं।
पेरेंट्स को कब और किन परिस्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि आपके बच्चे को बार-बार खांसी उठ रही है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है, सीटी जैसी आवाज आ रही है या फिर रात के समय सांस लेने से जुड़ी कोई भी समस्या महसूस हो रही है, तो तुरंत किसी योग्य बाल रोग विशेषज्ञ या पीडियाट्रिक पल्मोनोलॉजिस्ट से बच्चे की पूरी जांच करवानी चाहिए। इसके अलावा, यदि बच्चा बहुत तेजी से सांस ले रहा है, उसे बोलने में कठिनाई महसूस हो रही है या उसके होंठ और शरीर के नाखून नीले पड़ने लगे हैं, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है। ऐसी स्थिति में बिना एक पल गंवाए तुरंत नजदीकी अस्पताल जाना चाहिए।
बच्चों में अस्थमा को नियंत्रित और प्रबंधित करने के प्रभावी उपाय
डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सभी दवाइयां और इनहेलर का इस्तेमाल हमेशा नियमित रूप से करना चाहिए। अपने बच्चे को धूल, मिट्टी, धुएं और अन्य तमाम एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से सुरक्षित दूरी पर रखें। डॉक्टर के पास समय-समय पर नियमित फॉलो-अप कराते रहें और बच्चे के स्कूल तथा उसकी देखभाल करने वाले अन्य लोगों को भी उसकी इस बीमारी व आपातकालीन योजना के बारे में पूरी जानकारी दें। बच्चों में अस्थमा के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम या साधारण खांसी जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर सही पहचान और उचित इलाज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
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