Child Dengue: बरसात के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है और बच्चों को इस संक्रमण से बचाना माता-पिता के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। अक्सर तेज बुखार कम होने के बाद परिवार को लगता है कि बच्चा अब तेजी से स्वस्थ हो रहा है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक डेंगू में यही समय सबसे अधिक सावधानी बरतने वाला हो सकता है। बुखार उतरने के बाद अगले 24 से 48 घंटे बच्चों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इस दौरान कुछ मामलों में गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।
डेंगू के शुरुआती लक्षणों पर रखें नजर
डेंगू की शुरुआत में बच्चों को तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, उल्टी और बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन लक्षणों के कारण बच्चा काफी असहज महसूस करता है। जब कुछ दिनों बाद शरीर का तापमान सामान्य होने लगता है तो माता-पिता इसे बीमारी खत्म होने का संकेत समझ सकते हैं। हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार केवल बुखार का उतरना यह साबित नहीं करता कि डेंगू का खतरा समाप्त हो चुका है।
बुखार उतरने के बाद बढ़ सकता है गंभीर खतरा
फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा रस्तोगी के अनुसार, डेंगू के गंभीर चरण में शरीर से तरल पदार्थ के रिसाव जैसी समस्या हो सकती है। इससे ब्लड प्रेशर कम होने और शरीर में रक्त प्रवाह प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए बुखार कम होने के बाद बच्चे की निगरानी पहले से ज्यादा जरूरी हो जाती है। इस दौरान किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बच्चे की सामान्य स्थिति पर लगातार निगरानी जरूरी
रिकवरी के दौरान माता-पिता को बच्चे के व्यवहार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए। यह देखना जरूरी है कि बच्चा पर्याप्त मात्रा में पानी या अन्य तरल पदार्थ ले रहा है या नहीं। साथ ही पेशाब सामान्य रूप से हो रहा है या नहीं, अत्यधिक कमजोरी या सुस्ती तो नहीं है और बच्चा सामान्य प्रतिक्रिया दे रहा है या नहीं, इन बातों पर नजर रखनी चाहिए। लगातार उल्टी या पेट दर्द होने पर भी तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।
इन चेतावनी संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
नाक या मसूड़ों से खून आना, सांस लेने में परेशानी, त्वचा का असामान्य रूप से ठंडा या पीला पड़ना, बेहोशी जैसा महसूस होना और अचानक अत्यधिक कमजोरी गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए। डेंगू में स्थिति तेजी से बदल सकती है, इसलिए समय पर चिकित्सकीय मदद बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सिर्फ प्लेटलेट्स देखकर बीमारी की गंभीरता न समझें
डेंगू में प्लेटलेट्स की संख्या को लेकर परिवार अक्सर चिंतित रहते हैं, लेकिन बच्चे की पूरी स्थिति का आकलन केवल प्लेटलेट काउंट के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। डॉक्टर लक्षणों के साथ ब्लड प्रेशर, हेमाटोक्रिट, पेशाब की मात्रा और अन्य आवश्यक जांचों को ध्यान में रखकर बीमारी की गंभीरता का मूल्यांकन करते हैं। इसलिए रिपोर्ट के किसी एक आंकड़े के आधार पर खुद से निर्णय लेना उचित नहीं है।
दवाओं को लेकर बरतें विशेष सावधानी
बच्चे को बिना चिकित्सकीय सलाह के कोई दर्द निवारक या प्लेटलेट्स बढ़ाने वाली दवा नहीं देनी चाहिए। डेंगू के दौरान कौन-सी दवा सुरक्षित है और किससे बचना चाहिए, इसका निर्णय डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही होना चाहिए। पर्याप्त आराम, डॉक्टर द्वारा सुझाए गए तरल पदार्थ और पौष्टिक भोजन रिकवरी के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
फॉलो-अप और धीरे-धीरे सामान्य गतिविधियों पर लौटें
डेंगू से उबरते समय बच्चे को तुरंत सामान्य दिनचर्या में वापस लाने के बजाय धीरे-धीरे गतिविधियां बढ़ानी चाहिए। डॉक्टर ने यदि फॉलो-अप जांच या दोबारा परीक्षण की सलाह दी है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पर्याप्त आराम और सही निगरानी से रिकवरी को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।
बुखार उतरने के बाद भी सावधानी जरूरी
डेंगू में माता-पिता की सतर्कता केवल बुखार रहने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। बुखार कम होने के बाद के 24 से 48 घंटे भी बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। बच्चे के तरल सेवन, पेशाब, व्यवहार और चेतावनी संकेतों पर लगातार नजर रखना जरूरी है। किसी भी गंभीर लक्षण की स्थिति में तत्काल डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। समय पर पहचान और उपचार बच्चों को डेंगू की गंभीर जटिलताओं से बचाने में मदद कर सकते हैं।
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