Chitrakoot Deep Daan 2026 : भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट में इस साल दिवाली का त्योहार बेहद भव्य और भक्तिमय अंदाज में मनाया जा रहा है। मंदाकिनी नदी के घाटों पर लाखों दीपों की रोशनी ने ऐसा अद्भुत दृश्य बना दिया कि हर कोई इसे देखकर भावुक हो उठा। नदी में तैरते दीप ऐसे दिखाई दे रहे थे, मानो आसमान के चमकते तारे धरती पर उतर आए हों। तीन दिनों के भीतर करीब 18 लाख श्रद्धालुओं ने मंदाकिनी नदी में दीपदान किया। इस दौरान पूरा चित्रकूट रामभक्ति और धार्मिक आस्था के रंग में डूबा नजर आया।
धनतेरस से शुरू होता है पांच दिवसीय दीपदान मेला
चित्रकूट में आयोजित होने वाला वार्षिक दीपावली मेला पांच दिनों तक चलता है और इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अपने 14 वर्षों के वनवास में से करीब 11 वर्ष चित्रकूट में बिताए थे। इसी पवित्र भूमि पर उन्होंने मंदाकिनी नदी में स्नान किया और तपस्या की थी। यही वजह है कि यहां दीपदान को भगवान राम के प्रति श्रद्धा, प्रेम और कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।

तीन दिनों में 18 लाख श्रद्धालुओं ने किया दीपदान
इस बार चित्रकूट के मेले में उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचे हैं। अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार को करीब 6 लाख, शनिवार को 8 लाख और रविवार को अब तक लगभग 4 लाख लोगों ने मंदाकिनी में दीप प्रवाहित किए। इस तरह तीन दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या करीब 18 लाख तक पहुंच गई। दिवाली की शाम अकेले 10 लाख से अधिक लोगों के दीपदान करने का अनुमान जताया गया है।

मंदाकिनी के किनारे बनी टेंट सिटी, 10 किलोमीटर तक श्रद्धालुओं का जमावड़ा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण मंदाकिनी नदी के किनारे लगभग 10 किलोमीटर का क्षेत्र टेंट सिटी में बदल गया है। लोग अपने साथ टेंट, राशन, बर्तन और पीतल के दीपक लेकर पहुंचे हैं। कोई पैदल यात्रा करके आया है तो कोई ट्रैक्टर-ट्रॉली और बसों से परिवार सहित चित्रकूट पहुंचा है। घाटों के आसपास लगातार धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं और हर तरफ दीपों की चमक दिखाई दे रही है।
दो राज्यों में फैला है चित्रकूट का धार्मिक क्षेत्र
चित्रकूट का धार्मिक क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों में फैला हुआ है। इसका एक हिस्सा मध्य प्रदेश के सतना जिले में आता है, जबकि दूसरा उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले में स्थित है। मंदाकिनी नदी के किनारे कुल 70 घाट मध्य प्रदेश में हैं और शेष घाट उत्तर प्रदेश की सीमा में आते हैं। यहां श्रद्धालु लगभग पांच किलोमीटर की परिक्रमा करते हैं, जिसका तीन किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश में पड़ता है।

नंगे पैर परिक्रमा और राम नाम के जयकारों से गूंजे घाट
दीपावली मेले के दौरान श्रद्धालु नंगे पैर परिक्रमा करते हुए राम नाम का जाप करते हैं। इसके बाद मंदाकिनी में स्नान करके दीपदान करते हैं। पूरी रात घाटों पर भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम चलते रहते हैं। लाखों दीपों की रोशनी और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
सुरक्षा और सुविधाओं के लिए प्रशासन की विशेष व्यवस्था
मेले में उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सैकड़ों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। प्रशासन ने घाटों पर सफाई, पेयजल, चिकित्सा और सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। नदी में दीप प्रवाहित करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए गोताखोर और नावें भी तैनात हैं। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है।
दीपदान मेले से स्थानीय कारोबारियों को बड़ा फायदा
चित्रकूट का यह मेला स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों के लिए भी कमाई का बड़ा अवसर बन गया है। दीपक, फूल, प्रसाद, पूजा सामग्री और खाने-पीने की दुकानों पर भारी भीड़ उमड़ रही है। होटल और धर्मशालाएं भी लगभग पूरी तरह भर चुकी हैं। स्थानीय छोटे दुकानदारों के मुताबिक, सालभर की कमाई का बड़ा हिस्सा इसी पांच दिवसीय मेले से आता है। लाखों श्रद्धालुओं का यह जमावड़ा चित्रकूट की धार्मिक परंपरा और भारतीय संस्कृति में आस्था की गहरी जड़ों को दर्शाता है।


