Choti Diwali 2026 : हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को छोटी दिवाली और नरक चतुर्दशी के नाम से मनाया जाता है। दीपावली से एक दिन पहले पड़ने वाले इस पर्व का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। इस दिन घरों में दीपक जलाने, भगवान की पूजा करने और यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है। मान्यता है कि नरक चतुर्दशी पर विधि-विधान से दीपक जलाने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और अकाल मृत्यु का भय दूर होता है। धार्मिक विश्वास के अनुसार, इस दिन दीपदान करने से नरक की यातनाओं से भी मुक्ति मिलती है।
नाली या मुख्य द्वार के पास जलाया जाता है यम दीपक
नरक चतुर्दशी पर यमराज के नाम से एक विशेष दीपक जलाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। कई घरों में यह दीपक मुख्य द्वार के बाहर या घर की नाली के पास रखा जाता है। इसे यम दीपक कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, यमराज के निमित्त दीप जलाने से घर के सदस्यों को अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। मान्यता यह भी है कि यम दीपक परिवार की सुख-समृद्धि और सुरक्षा के लिए जलाया जाता है। इसलिए छोटी दिवाली की शाम दीपदान करते समय यमराज के नाम का दीपक जलाना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

छोटी दिवाली 2026 में दीपक जलाने का शुभ समय
अगर आप भी इस साल नरक चतुर्दशी पर दीपदान करने की तैयारी कर रहे हैं, तो शुभ समय का ध्यान रखना जरूरी है। उपलब्ध पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार, छोटी दिवाली यानी 7 नवंबर 2026 को दीपक जलाने का शुभ समय शाम 5 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर रात 8 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में घर के अलग-अलग स्थानों पर दीपक जलाए जा सकते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रदोष काल में दीपदान करना विशेष फलदायी माना जाता है।

छोटी दिवाली पर कितने दीपक जलाने चाहिए?
नरक चतुर्दशी पर दीपक जलाने की कोई निश्चित अधिकतम संख्या नहीं बताई जाती है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार घर में दीपक जला सकते हैं। हालांकि, धार्मिक परंपरा के अनुसार इस दिन कम से कम 14 दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया जाता है। इसके साथ ही यमराज के नाम से एक अलग दीपक भी जलाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मकता आती है और परिवार के सदस्यों पर शुभ कृपा बनी रहती है।
घर के किन-किन स्थानों पर जलाएं दीपक?
छोटी दिवाली पर घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोईघर, आंगन, छत और खिड़कियों के पास दीपक जलाने की परंपरा है। इसके अलावा तुलसी के पौधे, अध्ययन कक्ष, कार्यस्थल, अन्न भंडार और पवित्र वृक्ष के पास भी दीपक रखे जा सकते हैं। दक्षिण दिशा में दीपदान का भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। घर के बाहर और जल स्रोत के पास भी श्रद्धालु दीपक जलाते हैं। इस तरह पूरे घर को रोशनी से सजाया जाता है।

दीपदान करते समय इन नियमों का रखें ध्यान
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी दिवाली पर दीपक जलाने के लिए मिट्टी के दीपकों का उपयोग करना शुभ माना जाता है। दीपदान प्रदोष काल में करना विशेष फलदायी बताया गया है। यमराज के नाम का दीपक घर के मुख्य द्वार के बाहर या नाली के पास रखा जा सकता है। दीपक जलाते समय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखें। साथ ही दीपक ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें, जहां आग लगने या किसी दुर्घटना का खतरा न हो। इन परंपराओं के साथ नरक चतुर्दशी का पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाता है।
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