Anti Defection Law : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलने वाले सांसदों और विधायकों पर 10 साल का प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। CJP के समर्थन के बाद एक बार फिर भारत में दलबदल विरोधी कानून को लेकर बहस तेज हो गई है। पार्टी ने अपने मांग-पत्र में दलबदल करने वाले नेताओं के खिलाफ इससे भी सख्त कार्रवाई की मांग की है।
CJP ने 20 साल के प्रतिबंध का रखा प्रस्ताव
CJP की ओर से जारी मांगों की सूची के पांचवें बिंदु में पार्टी ने दलबदल करने वाले नेताओं के चुनाव लड़ने और सार्वजनिक पद संभालने पर 20 साल तक रोक लगाने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि कोई सांसद या विधायक जिस पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीतकर आता है, बाद में दूसरी पार्टी में चला जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। CJP ने इसे राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ते हुए सख्त प्रावधान की वकालत की है।
सौरव दास ने दलबदल को बताया देश के साथ धोखा
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने बड़े पैमाने पर होने वाले राजनीतिक दलबदल और सरकारों को गिराने के लिए कथित आर्थिक लेन-देन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सांसदों और विधायकों को कथित तौर पर बड़ी रकम देकर राजनीतिक दलों को तोड़ना और सरकारों को गिराना देश के साथ धोखे के समान है। दास ने दावा किया कि मौजूदा दलबदल विरोधी कानून को अब बदलने की जरूरत है।
कपिल सिब्बल के प्रस्ताव का किया समर्थन
सौरव दास ने सोशल मीडिया पोस्ट में वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल के प्रस्ताव का स्वागत किया। उनके मुताबिक, यदि कोई सांसद या विधायक किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीत हासिल करने के बाद पैसे या दबाव के चलते दूसरी पार्टी में शामिल होता है, तो उसे लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। सिब्बल के प्रस्ताव में ऐसे नेताओं पर 10 साल के प्रतिबंध की बात कही गई है।
अभिजीत दिपके ने 20 साल की रोक की वकालत की
CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने भी दलबदलुओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पार्टी के मुताबिक, केवल 10 साल का प्रतिबंध पर्याप्त नहीं होगा और ऐसे नेताओं को 20 साल तक चुनाव लड़ने या किसी सार्वजनिक पद पर बैठने से रोका जाना चाहिए। CJP का कहना है कि राजनीतिक दल बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए कठोर कानून समय की जरूरत है।
दलबदल विरोधी कानून के दुरुपयोग का आरोप
सौरव दास ने आरोप लगाया कि दलबदल विरोधी कानून का इस्तेमाल कई बार राजनीतिक फायदे के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बने रहने की राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण इस कानून का कथित तौर पर दुरुपयोग हुआ है। उन्होंने युवाओं से व्यवस्था में बदलाव लाने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक दलबदल के जरिए सरकारों को अस्थिर करने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगनी चाहिए।
बालाघाट मामले पर दिपके ने साधा निशाना
इससे पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार पर भी निशाना साधा था। उन्होंने बालाघाट जिले में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक व्यंग्यात्मक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने खुद को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए अपना कथित इस्तीफा पेश किया था।
इस्तीफे के बहाने सरकार पर किया कटाक्ष
दिपके ने 13 अगस्त को राज्यपाल मंगूभाई पटेल को संबोधित कथित पत्र में कहा था कि बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उनका जमीर उन्हें पद पर बने रहने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी व्यंग्यात्मक अंदाज में धन्यवाद किया और कहा कि उन्हें मध्य प्रदेश के लोगों की सेवा करने का अवसर मिला, लेकिन वे इसका सही इस्तेमाल करने में पूरी तरह नाकाम रहे।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से मांगा जवाब
बालाघाट में 30 से अधिक बच्चों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा था। मामले में कथित संक्रामक बीमारियों के कारण बच्चों की मौत को लेकर अदालत में सवाल उठाए गए हैं। इसी मुद्दे को CJP ने भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाया है। अब पार्टी की दलबदल विरोधी मांग ने राजनीतिक जवाबदेही और चुनावी सुधार को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
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