CM hints more names : छत्तीसगढ़ में चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राज्य के चर्चित शराब घोटाले में चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया। उन पर आरोप है कि उन्होंने शराब सिंडिकेट को मदद पहुंचाई और घोटाले से करीब 13 करोड़ रुपये का फायदा उठाया। ईडी ने उनके खिलाफ वित्तीय लेन-देन से जुड़े ठोस सबूतों के आधार पर कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री का बड़ा बयान: “अभी और नाम सामने आएंगे”
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर खुलकर बयान देते हुए कहा, “ईडी एक केंद्रीय जांच एजेंसी है, वह बहुत सोच-समझकर कार्रवाई करती है। किसी के कहने पर वह कुछ नहीं करती। कांग्रेस का काम ही है जनता को परेशान करना।” उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि पार्टी जब सत्ता में थी, तब एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई। अब सड़कें जाम कर जनता की मुश्किलें बढ़ाने में जुटी है।सीएम ने आगे चेतावनी देते हुए कहा, “ईडी की कार्रवाई अभी जारी है। कई लोग पहले ही जेल में हैं और कुछ जमानत पर बाहर हैं। अभी आगे-आगे देखिए, किसका नंबर आता है।” इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में इस घोटाले से जुड़े और भी नाम सामने आ सकते हैं।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल को भ्रष्टाचार से भरा बताया। उनका कहना है कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उनके नेताओं ने जनता को धोखा दिया और घोटालों के ज़रिए निजी फायदा उठाया। “अब वही भ्रष्टाचार उन्हें जेल की ओर ले जा रहा है,” मुख्यमंत्री ने दो टूक कहा।
कांग्रेस का पलटवार: ‘राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई’
दूसरी ओर कांग्रेस ने चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को राजनीतिक दबाव में की गई कार्रवाई करार दिया है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि ईडी अब भाजपा की एजेंसी बन चुकी है और इसका इस्तेमाल विपक्ष की आवाज़ को दबाने के लिए किया जा रहा है। पार्टी ने इस मुद्दे पर मोर्चा खोलते हुए ऐलान किया है कि वह 22 जुलाई को पूरे प्रदेश में ‘आर्थिक नाकेबंदी’ करेगी। शनिवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सभी जिलों में ईडी और भाजपा सरकार के खिलाफ पुतला दहन कर विरोध प्रदर्शन किया।
“ईडी भाजपा की कठपुतली बन चुकी है”: कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि केंद्र सरकार के इशारे पर ईडी विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है। “जब भाजपा की सरकार खुद घोटालों में डूबी हुई है, तब वह दूसरों पर उंगली उठा रही है,” कांग्रेस प्रवक्ताओं ने कहा। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि ईडी वाकई निष्पक्ष है, तो भाजपा नेताओं पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
राजनीति बनाम जांच: कौन सही, कौन गलत?
राज्य की राजनीति इस गिरफ्तारी के बाद दो धड़ों में बंट गई है। भाजपा जहां इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ जरूरी कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास मान रही है।
हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब ईडी की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। पहले भी कई विपक्षी नेता यह आरोप लगाते रहे हैं कि उनके खिलाफ ईडी का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे कानून का पालन कहता है।
क्या चैतन्य बघेल अकेले हैं या और भी हैं शामिल?
मुख्यमंत्री के संकेतों से यह तो स्पष्ट है कि ईडी की जांच अभी और आगे बढ़ेगी और नए नाम सामने आ सकते हैं।
13 करोड़ रुपये का लाभ उठाने का आरोप सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं टिकता, यह संकेत करता है कि जांच में और लोग शामिल हो सकते हैं।
जनता की नज़र अब आगे की कार्रवाई पर
इस पूरे मामले में राज्य की जनता भी दो हिस्सों में बंटी दिख रही है। एक तरफ वे लोग हैं जो ईडी की कार्रवाई को सही मानते हैं और चाहते हैं कि भ्रष्टाचारियों को सजा मिले। वहीं दूसरी तरफ वे लोग हैं जो इसे सत्ता का दुरुपयोग मानते हैं और इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं।
22 जुलाई को कांग्रेस की ओर से की जाने वाली आर्थिक नाकेबंदी को लेकर भी लोगों में उत्सुकता है कि क्या यह प्रदर्शन बड़ा रूप लेगा और क्या इससे सरकार पर कोई दबाव बनेगा।
सियासी घमासान और तेज़ होने के आसार
चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति में गर्मी और तेज़ हो गई है। मुख्यमंत्री ने जहां और नाम सामने आने की बात कहकर संकेत दे दिए हैं कि जांच लंबी चलेगी, वहीं कांग्रेस इस पूरे मामले को राजनीति से प्रेरित बता रही है। अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में ईडी की अगली कार्रवाई किस ओर रुख करती है और यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।