कृषि

Cockroach Janta Party: सोशल मीडिया पर उड़ा मजाक, लेकिन फसलों के लिए काल हैं ये कीड़े

Cockroach Janta Party:  इंटरनेट और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया बेहद अजीब और अनपेक्षित है, यहाँ कब कौन सी चीज़ रातों-रात वायरल होकर ट्रेंडिंग बन जाए, इसका अंदाजा लगाना नामुमकिन है. आजकल डिजिटल प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम के एक सटायर (व्यंग्य) पेज ने सोशल मीडिया की दुनिया में तहलका मचा रखा है. इस पेज ने अपनी अनोखी और मजाकिया राजनीतिक शैली के दम पर महज 4 दिनों के भीतर 11 मिलियन (1.1 करोड़) से भी अधिक फॉलोअर्स बटोर कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसी देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स को भी पीछे छोड़ दिया है.

इंटरनेट पर कॉकरोच का यह बढ़ता सियासी रसूख और दबदबा भले ही लोगों को हंसने-मुस्कुराने पर मजबूर कर रहा हो, लेकिन क्या आप जानते हैं कि वास्तविक जीवन में, विशेष रूप से हमारी खेती-किसानी और कृषि व्यवस्था के लिए ये कॉकरोच कितने बड़े विलेन (खलनायक) साबित हो सकते हैं? खेतों में इनकी तादाद का अनियंत्रित होना किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा से कम नहीं होता, क्योंकि ये फसलों को भीतर से पूरी तरह खोखला करने की ताकत रखते हैं. आइए विस्तार से जानते हैं कि सोशल मीडिया पर राज करने वाले ये जीव खेतों में किस कदर तबाही मचाते हैं.

जमीन के भीतर सुरंगें बनाकर मिट्टी को करते हैं पोला, उखड़ जाते हैं हरे-भरे पौधे

खेतों और बागवानों में कॉकरोचों की बढ़ती मौजूदगी फसलों के स्वास्थ्य के लिए सबसे पहला और सीधा आघात उनकी जड़ों पर करती है. दरअसल, कॉकरोच की कुछ विशिष्ट प्रजातियां ऐसी होती हैं जो सीधे सूर्य की रोशनी से बचकर जमीन के नीचे अंधेरे में छिपकर रहना पसंद करती हैं. ये जीव मिट्टी के भीतर अपना आशियाना यानी कॉलोनियां बनाने के लिए लगातार सुरंगें, छेद और खोह खोदते रहते हैं.

इस निरंतर खुदाई के कारण पौधों और फसलों की जड़ों के आसपास की जीवनदायिनी मिट्टी बेहद पोली, ढीली और कमजोर हो जाती है. मिट्टी के ढीले हो जाने से पौधों की जमीन पर जो मजबूत पकड़ होनी चाहिए, वह पूरी तरह समाप्त हो जाती है. परिणाम यह होता है कि सामान्य से थोड़ी भी तेज हवा चलने या हल्की फुल्की बारिश होने पर भी खड़ी फसलें जड़ से उखड़कर जमीन पर गिर जाती हैं.

फसलों की नाजुक और नई जड़ों को चबा जाते हैं कॉकरोच, सूखने लगती है खड़ी फसल

कॉकरोच केवल मिट्टी को पोला करके ही दम नहीं लेते, बल्कि इनका अगला हमला और भी ज्यादा घातक होता है. ये जमीन के अंदर पनप रही पौधों की नई, मुलायम और नाजुक प्राथमिक जड़ों को बेरहमी से कुतर-कुतर कर अपना भोजन बनाने लगते हैं. विज्ञान के नियमानुसार, जब किसी भी पौधे या पेड़ की मुख्य जड़ें ही कट या छंट जाती हैं, तो मिट्टी से मिलने वाले आवश्यक पोषक तत्व (न्यूट्रिएंट्स), खनिज लवण और पानी का प्रवाह पौधे के ऊपरी हिस्सों तक पहुंचना पूरी तरह बंद हो जाता है. पोषण के अभाव में हरी-भरी और लहलहाती खड़ी फसल देखते ही देखते पीली पड़ने लगती है और अंततः पूरी तरह सूखकर नष्ट हो जाती है.

खेतों में खतरनाक फंगस और बैक्टीरिया फैलाने के सबसे बड़े वाहक हैं ये जीव

कॉकरोच सिर्फ फसलों की जड़ों को भौतिक नुकसान पहुंचाने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खेतों के पारिस्थितिकी तंत्र में गंभीर और संक्रामक बीमारियां फैलाने वाले सबसे बड़े जैविक वाहक (कैरियर) माने जाते हैं. कॉकरोच के शरीर की बनावट और उनके मल-मूत्र में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस (कवक) के बीजाणु चिपके रहते हैं. जब ये संक्रमित कॉकरोच रात के अंधेरे में खेतों में खुलेआम घूमते हैं, तो वे स्वस्थ पौधों की हरी पत्तियों, टहनियों और तनों पर फंगल इन्फेक्शन (कवक संक्रमण) फैला देते हैं. इस फंगस के कारण पौधों में सड़न पैदा होने लगती है और पूरी की पूरी फसल समय से पहले ही सड़कर बर्बाद हो जाती है.

तैयार उपज और खलिहानों पर हमला, अनाज को जहरीला और बदबूदार बनाकर करते हैं नष्ट

इन जीवों का कहर यहीं पर नहीं थमता, बल्कि जब किसानों की मेहनत रंग लाती है और फसल पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है, तब भी ये कॉकरोच एक बड़ी मुसीबत बनकर सामने आते हैं. खेतों में या कटाई के बाद खलिहानों और गोदामों में रखे अनाज के दानों पर ये जीव धावा बोल देते हैं और उन्हें बुरी तरह डैमेज (क्षतिग्रस्त) कर देते हैं.

कटी हुई फसलों या भंडारित अनाज पर कॉकरोच का मलमूत्र गिरने और उनके रेंगने से पूरी की पूरी कीमती उपज जहरीली, दूषित और बेहद बदबूदार हो जाती है. ऐसी संक्रमित फसल न तो इंसानों या पशुओं के खाने के योग्य बचती है और न ही इसे मार्केट में किसी भी दाम पर बेचा जा सकता है. इस प्रकार, सोशल मीडिया पर मनोरंजन का साधन बनने वाले ये कॉकरोच हकीकत में अन्नदाताओं की महीनों की खून-पसीने की मेहनत पर पल भर में पानी फेर देते हैं.

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