Home Gardening
Home Gardening: आजकल अपने घर के गार्डन या खेत में ताजी और हरी सब्जियां उगाना लोगों का एक बेहद पसंदीदा शौक बन चुका है। बाजार में मिलने वाली रसायनों से युक्त सब्जियों की तुलना में घर की उगाई गई केमिकल-फ्री और ऑर्गेनिक सब्जियां सेहत के लिए अमृत समान होती हैं। इसके साथ ही, बीज बोने से लेकर पौधों को बड़ा होते देखने की पूरी प्रक्रिया मानसिक शांति और आनंद देती है। हालांकि, कई बार लोग शिकायत करते हैं कि दिन-रात कड़ी मेहनत करने और पौधों की देखभाल करने के बाद भी वैसी पैदावार नहीं मिलती जैसी मिलनी चाहिए। कई बार तो सब्जियां आने से पहले ही अच्छे-भले पौधे अचानक सूख जाते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण यह है कि हम अनजाने में बागवानी से जुड़ी कुछ बेहद बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जो हमारी पूरी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
सब्जियां उगाते समय लोग अक्सर सबसे बड़ी लापरवाही मिट्टी के चयन में करते हैं। अधिकांश लोग बिना सोचे-समझे किसी भी सामान्य या सख्त मिट्टी में बीज बो देते हैं। यह पौधों के विकास को पूरी तरह रोक देता है। हरी सब्जियों की जड़ों के तेजी से फैलने के लिए मिट्टी का हल्का, भुरभुरा और पोषक तत्वों से भरपूर होना अनिवार्य है। केवल सामान्य मिट्टी के बजाय, आपको एक विशेष पॉटिंग मिक्स तैयार करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी में बराबर मात्रा में कोकोपीट (जो नमी बनाए रखता है), वर्मीकंपोस्ट या केंचुआ खाद (जो पोषण देता है) और थोड़ी सी नीम खली (जो जड़ों को फंगस और कीड़ों से बचाती है) को आपस में अच्छी तरह मिलाकर ही गमलों या क्यारियों में भरना चाहिए।
गार्डनिंग की शुरुआत में की जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी चूक है बिना सोचे-समझे सस्ते या खराब क्वालिटी के बीजों का चयन करना। स्थानीय दुकानों से लिए गए पुराने या घटिया किस्म के बीजों की वजह से पौधे शुरुआत से ही बेहद कमजोर रह जाते हैं। ऐसे पौधों में बीमारियां और कीट लगने का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है और वे मौसम के छोटे-मोटे बदलावों को भी सहन नहीं कर पाते। एक्सपर्ट्स की मानें तो अच्छी पैदावार के लिए हमेशा किसी प्रामाणिक और भरोसेमंद ब्रांड के हाइब्रिड और रोग-प्रतिरोधी (डिसीज-रेसिस्टेंट) बीजों को ही प्राथमिकता देनी चाहिए, जिससे उनका अंकुरण (जर्मिनेशन) बेहतर और स्वस्थ हो।
सब्जियों के पौधों की बर्बादी का एक बहुत ही सामान्य कारण सिंचाई का सही तरीका और समय न मालूम होना है। कई लोग उत्साह में आकर गमलों में हर समय पानी भरकर रखते हैं। इस ओवर-वाटरिंग की वजह से मिट्टी में ऑक्सीजन का प्रवाह रुक जाता है, जिससे पौधों की जड़ें नीचे से गलने और सड़ने लगती हैं और उन पर फंगस का जानलेवा हमला हो जाता है। स्मार्ट गार्डनिंग का सीधा नियम यह है कि पौधों में पानी तभी डालें जब उंगली से छूने पर मिट्टी की ऊपरी सतह कम से कम एक इंच तक सूखी दिखाई दे। इसके अलावा, दोपहर की तेज धूप में पानी देने से बचें और हमेशा सुबह या शाम के ठंडे वक्त में ही सिंचाई करें।
पानी और खाद के साथ-साथ पौधों के लिए सूर्य का प्रकाश सबसे जरूरी भोजन है। अक्सर लोग पौधों को घर के ऐसे कोनों, बालकनी या छांव वाली जगहों पर रख देते हैं जहां पर्याप्त रोशनी नहीं पहुंचती। पालक, मेथी, धनिया, मिर्च और टमाटर जैसी हरी सब्जियों को अच्छी तरह फलने-फूलने के लिए रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी और अच्छी धूप मिलना बेहद जरूरी है। यदि आप पौधों को पर्याप्त धूप वाली जगह पर रखेंगे और पानी का सही संतुलन बनाए रखेंगे, तो आपके पौधों की ग्रोथ दोगुनी तेजी से होगी और आपको घर बैठे ही सीजन की सबसे बेहतरीन, फ्रेश और सेहतमंद हरी सब्जियां तोड़ने को मिलेंगी।
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