Cold in Mainpat: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित मैनपाट, जिसे अपनी प्राकृतिक सुंदरता और ठंड के कारण ‘छत्तीसगढ़ का शिमला’ कहा जाता है, इस समय कड़ाके की शीतलहर की चपेट में है। रविवार की सुबह मैनपाट के निवासियों और यहाँ आए सैलानियों के लिए एक बर्फीले अहसास जैसी रही। न्यूनतम तापमान गिरकर 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जिसने इस सीजन के पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कड़ाके की इस ठंड ने न केवल जनजीवन को प्रभावित किया है, बल्कि प्राकृतिक दृश्यों को भी अद्भुत बना दिया है।
मैनपाट के ऊपरी इलाकों में रविवार सुबह तापमान शून्य के करीब पहुँचने के कारण ‘फ्रॉस्ट’ (पाला) की स्थिति देखी गई। पुआल के ढेरों, सब्जियों के कोमल पौधों और खुले मैदानों में घास-फूस पर ओस की बूंदें जम गई थीं, जो देखने में सफेद बर्फ की चादर जैसी प्रतीत हो रही थीं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, मैनपाट के अलावा अन्य पाट क्षेत्रों (पहाड़ी पठारों) से भी ओस के बर्फ बनने की सूचना मिली है। यह नजारा उत्तर भारत के पहाड़ी स्टेशनों की याद दिला रहा है।
जैसे-जैसे पारा गिर रहा है, वैसे-वैसे मैनपाट में पर्यटकों की आमद बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में सैलानी इस ‘मिनी शिमला’ का अनुभव लेने पहुँच रहे हैं। अलसुबह घास पर जमी बर्फ के साथ तस्वीरें खिंचवाना और अलाव (Fireplace) के पास बैठकर ठंड का आनंद लेना पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है। पर्यटन विभाग और स्थानीय होटलों में भी इस सीजन के दौरान भारी भीड़ देखी जा रही है।
तापमान में आई इस भारी गिरावट ने जहाँ पर्यटकों के चेहरे खिला दिए हैं, वहीं स्थानीय किसानों के लिए चिंता बढ़ा दी है। पाला (Frost) पड़ने के कारण टमाटर, आलू और अन्य मौसमी सब्जियों के पौधों के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में धुआं करें या हल्की सिंचाई करें ताकि तापमान को संतुलित रखा जा सके और फसलों को पाले के नुकसान से बचाया जा सके।
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत से आ रही सूखी और ठंडी हवाओं के कारण सरगुजा संभाग में ठंड का असर अभी और बढ़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों तक मैनपाट और आसपास के इलाकों में इसी तरह कड़ाके की ठंड और सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने की संभावना है। प्रशासन ने बढ़ती ठंड को देखते हुए सार्वजनिक स्थलों पर अलाव की व्यवस्था तेज कर दी है।
मैनपाट अपनी समुद्र तल से ऊँचाई और घने जंगलों के कारण प्रदेश का सबसे ठंडा स्थान माना जाता है। यहाँ का ‘उल्टा पानी’, ‘टाइगर पॉइंट’ और ‘फिश पॉइंट’ जैसे दर्शनीय स्थल सैलानियों को आकर्षित करते हैं। इसके अलावा, यहाँ की तिब्बती संस्कृति और मठ इसे अन्य हिल स्टेशनों से अलग पहचान दिलाते हैं। सर्दियों में यहाँ का तापमान अक्सर 0 से 5 डिग्री के बीच रहता है, जो इसे विंटर डेस्टिनेशन के रूप में नंबर-1 बनाता है।
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