Surguja Plastic Roads
Surguja Plastic Roads: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले ने कचरा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए एक अनूठा नवाचार किया गया है, जहाँ अब प्लास्टिक वेस्ट का उपयोग प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है। इस पहल के माध्यम से न केवल प्रदूषण फैलाने वाले प्लास्टिक का निपटान हो रहा है, बल्कि यह जिला प्रशासन के लिए आय और टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर का नया आधार भी बन गया है। मैनपाट क्षेत्र में पहली बार प्रयोगात्मक तौर पर ऐसी सड़क का निर्माण शुरू हुआ है, जो डामर और प्लास्टिक के मिश्रण से तैयार की जा रही है।
सड़क निर्माण की इस आधुनिक तकनीक को बतौली विकासखंड के सुवारपारा स्थित डामर प्लांट में अंजाम दिया जा रहा है। यहाँ गिट्टी और बिटुमिन (डामर) के गर्म मिश्रण में प्लास्टिक कचरे को मिलाया जाता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर ने बताया कि डामरीकरण की ओजीपीसी (OGPC) लेयर में डामर के कुल वजन का लगभग 8 प्रतिशत वेस्ट प्लास्टिक मिक्स किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्लास्टिक के उपयोग से सड़क की जलरोधक क्षमता बढ़ती है, जिससे मानसून के दौरान सड़कों के खराब होने का खतरा कम हो जाता है। इससे न केवल सड़क की ‘ड्यूरेबिलिटी’ (मजबूती) बढ़ती है, बल्कि उसकी सर्विस लाइफ में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है।
जो प्लास्टिक वेस्ट कभी शहर की नालियों और पर्यावरण के लिए बड़ी मुसीबत हुआ करता था, आज वह सरगुजा की महिलाओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत कचरा कलेक्शन का काम कर रही महिला समूहों के लिए यह आय का एक बड़ा स्रोत बन गया है। पहले इस प्लास्टिक वेस्ट को बाजार में मात्र 15 से 20 रुपये प्रति किलो का भाव मिल पाता था। लेकिन जिला प्रशासन के विशेष प्रयासों के बाद, अब सड़क निर्माण के लिए इस कचरे को 25 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदा जा रहा है। इससे महिलाओं की आमदनी में वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।
सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने इस परियोजना की सफलता पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि दरिमा स्थित जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग इकाई (MRF) इस पूरी कड़ी का मुख्य केंद्र है। वर्तमान में मैनपाट में बन रही 1 किलोमीटर लंबी सड़क में लगभग 500 किलोग्राम प्लास्टिक वेस्ट का सफलतापूर्वक उपयोग किया गया है। दरिमा के एसआरएफ (SRF) सेंटर से पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा यह प्लास्टिक खरीदा जाता है, जिसे बाद में ठेकेदार सड़क बनाने में इस्तेमाल करते हैं। कलेक्टर ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में जिले की अन्य सड़कों के निर्माण में भी इसी केंद्र से अधिक मात्रा में प्लास्टिक की सप्लाई ली जाएगी।
सरगुजा का यह मॉडल देश के अन्य हिस्सों के लिए एक नजीर पेश करता है। यह दिखाता है कि कैसे ‘वेस्ट-टू-वेल्थ’ (कचरे से कंचन) की अवधारणा को धरातल पर उतारा जा सकता है। प्लास्टिक कचरे का सड़कों में उपयोग करने से डामर की खपत में कमी आती है, जिससे निर्माण लागत भी घटती है और कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद मिलती है। जिला प्रशासन की इस दूरगामी सोच ने सरगुजा को कचरा मुक्त बनाने और ग्रामीण कनेक्टिविटी को आधुनिक बनाने की दिशा में एक नई ऊर्जा प्रदान की है।
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