LPG Price Cut : जुलाई महीने की शुरुआत व्यावसायिक जगत के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने आज 1 जुलाई 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में उल्लेखनीय कटौती की है। इस फैसले के तहत, कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम में औसतन 183.50 रुपये तक की कमी की गई है। बीते पांच महीनों से लगातार आसमान छूती कीमतों के कारण रेस्टोरेंट, होटल और ढाबा मालिकों पर आर्थिक दबाव काफी बढ़ गया था, लेकिन इस नई कटौती से अब व्यावसायिक संचालकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। यह वर्ष 2026 में पहली बार है जब कमर्शियल गैस के दाम घटाए गए हैं।

प्रमुख शहरों में कमर्शियल सिलेंडर की नई दरें
देश की राजधानी दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर के दाम ₹3,113.50 से घटकर अब ₹2,930 हो गए हैं, जो कि ₹183.50 की सीधी राहत है। इसी तरह, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी कीमतों में ₹183.50 की कटौती की गई है, जिससे सिलेंडर का नया भाव ₹3,052.50 निर्धारित किया गया है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी उपभोक्ताओं को ₹174 की राहत मिली है, जिसके बाद वहां 19 किलो वाला सिलेंडर ₹3,255.50 से घटकर ₹3,081.50 पर आ गया है। बिहार की राजधानी पटना में भी कीमतों में कमी देखी गई है, जहाँ कमर्शियल सिलेंडर अब ₹3,227.00 की नई दर पर उपलब्ध होगा। इन बदलावों से स्थानीय स्तर पर खान-पान के व्यवसाय में लागत कम होने के संकेत हैं।

घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं
जहां कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है, वहीं आम गृहिणियों के लिए फिलहाल स्थिति जस की तस बनी हुई है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई छेड़छाड़ नहीं की है। इनके दाम पूरी तरह स्थिर रखे गए हैं, जिसका अर्थ है कि आम आदमी की रसोई के बजट पर न तो कोई अतिरिक्त बोझ बढ़ा है और न ही कोई नई राहत मिली है। दिल्ली में घरेलू सिलेंडर ₹942.00, लखनऊ में ₹979.50, कोलकाता में ₹968.00 और पटना में ₹1,031.50 की पुरानी दरों पर ही उपलब्ध रहेंगे।
व्यावसायिक गतिविधियों को मिलेगा नया संबल
लगातार पांच महीनों से बढ़ती महंगाई के बाद, कमर्शियल गैस के दामों में यह कटौती छोटे और मध्यम स्तर के उद्यमियों के लिए संजीवनी का काम करेगी। गैस की ऊंची कीमतों के कारण होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को अपनी सेवाओं के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा था, लेकिन अब इस राहत के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि कैटरिंग और बाहरी खान-पान के खर्चों में स्थिरता आएगी। सरकार और तेल कंपनियों के इस कदम को व्यावसायिक गतिविधियों को गति देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, जुलाई की शुरुआत ने देश भर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को आर्थिक राहत का बड़ा तोहफा दिया है।
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