Gyanesh Kumar : कथित वोट चोरी के मुद्दे पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की चर्चा के बीच कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सामने कुछ शर्तें रखी हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि गृह मंत्री वास्तव में इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें सबसे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित करना चाहिए। इसके साथ ही मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया को भी रोकना चाहिए।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 82 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सत्रावसान की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। इस स्थिति को लेकर उन्होंने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।

विशेष सत्र के लिए अमित शाह के सामने रखीं शर्तें
जयराम रमेश ने अपनी पोस्ट में कहा कि अगर अमित शाह कथित वोट चोरी पर विशेष सत्र बुलाने को लेकर गंभीर हैं, तो उन्हें सबसे पहले मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा सुनिश्चित करना चाहिए। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग का इस्तेमाल राजनीतिक हथकंडे के तौर पर किया जा रहा है।उन्होंने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण पर भी सवाल उठाते हुए इसे तत्काल स्थगित करने की मांग की। कांग्रेस का मानना है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा से पहले सरकार को विपक्ष की चिंताओं का समाधान करना चाहिए।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर भी उठाए सवाल
कांग्रेस महासचिव ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार को इन विषयों से संबंधित नए प्रस्ताव विपक्षी दलों के साथ काफी पहले साझा करने चाहिए थे, ताकि सभी दलों को उन पर विचार करने और अपनी राय रखने का पर्याप्त समय मिल सके।रमेश ने सवाल उठाया कि गृह मंत्री इन प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों बच रहे हैं। उनके मुताबिक, सरकार को संसद में किसी भी बड़े विधायी बदलाव से पहले विपक्ष को भरोसे में लेना चाहिए।
परिसीमन विधेयक को लेकर कांग्रेस का बड़ा आरोप
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अमित शाह की विशेष सत्र बुलाने की बात के पीछे परिसीमन विधेयक को लोकसभा में पारित कराने की मंशा हो सकती है। उन्होंने दावा किया कि सरकार अब भी लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के साथ परिसीमन विधेयक पारित कराने की संभावनाओं पर विचार कर रही है।कांग्रेस नेता के अनुसार, प्रस्तावित विधेयकों की वास्तविक विषयवस्तु अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन उनका उद्देश्य स्पष्ट दिखाई देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इन प्रस्तावों के जरिए 2029 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को संभावित राजनीतिक नुकसान से बचाने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, यह जयराम रमेश का राजनीतिक आरोप है।

एसआईआर पर चर्चा की मांग ठुकराने का भी लगाया आरोप
कांग्रेस नेता ने गृह मंत्री के पुराने रुख का हवाला देते हुए कहा कि जब पिछले साल विपक्षी दलों ने संसद में एसआईआर पर चर्चा की मांग की थी, तब अमित शाह ने यह कहते हुए चर्चा से इनकार कर दिया था कि यह निर्वाचन आयोग के अधिकार क्षेत्र का विषय है।रमेश ने सवाल किया कि यदि एसआईआर निर्वाचन आयोग का अधिकार क्षेत्र है, तो अब कथित वोट चोरी पर विशेष सत्र बुलाने की बात क्यों की जा रही है?
उन्होंने गृह मंत्री से अपनी मांगों पर पहले अमल करने और परिसीमन प्रस्तावों पर विपक्ष के साथ पारदर्शी चर्चा करने की अपील की।फिलहाल विशेष सत्र को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज होती दिखाई दे रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार विपक्ष की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और संसद में इन मुद्दों पर चर्चा का रास्ता निकलता है या नहीं।


