H1B Visa Fee Increase: H-1B वीजा फीस बढ़ाने पर ट्रंप के फैसले पर कांग्रेस का हमला,  ‘PM मोदी कमज़ोर हैं, देश को भुगतना पड़ेगा नुकसान’

H1B Visa Fee Increase: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा आवेदकों को प्रायोजित करने वाली कंपनियों के लिए फीस 100,000 डॉलर तक बढ़ाने के कार्यकारी आदेश पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस निर्णय से भारत के करोड़ों आईटी पेशेवर और युवाओं के हित प्रभावित होने की आशंका है।

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इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह कोई नया संकट नहीं है बल्कि इसकी चेतावनी कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वर्षों पहले ही दे दी थी।

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राहुल गांधी ने पहले ही दी थी चेतावनी: पवन खेड़ा

पवन खेड़ा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह कोई नई बात नहीं है। 5 जुलाई 2017 को राहुल गांधी ने ट्वीट कर प्रधानमंत्री मोदी को आगाह किया था कि ऐसा होने वाला है और उन्हें कुछ करना चाहिए। लेकिन वह तब भी एक कमजोर प्रधानमंत्री थे और आज भी हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी देश के लिए महंगी पड़ने वाली है। H-1B वीजा प्रणाली भारतीय आईटी सेक्टर की रीढ़ रही है, और अमेरिका द्वारा इसे सीमित करना या इस पर भारी वित्तीय बोझ डालना भारत के टैलेंट और युवा वर्ग के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

‘हर दिन हो रहा है अपमान, लेकिन प्रधानमंत्री चुप हैं’

पवन खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका में ट्रंप प्रशासन लगातार भारत के हितों की अनदेखी और अपमान कर रहा है।“ट्रंप हर दिन हमारा अपमान कर रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री चुप हैं। राहुल गांधी ने उन्हें संसद में यह कहने का मौका दिया था कि ट्रंप झूठे हैं। अगर उन्होंने ऐसा कहा होता, तो देश उनके साथ खड़ा होता।”

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करोड़ों युवाओं के लिए बुरी खबर

H-1B वीजा भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए अमेरिका में रोजगार पाने का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में प्रायोजन शुल्क में इस स्तर की वृद्धि का मतलब होगा कि कई कंपनियां अब भारतीय प्रतिभाओं को अमेरिका भेजने से बचेंगी। इससे न केवल नौकरी के अवसर कम होंगे, बल्कि भारत की वैश्विक आईटी उपस्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम जहां अमेरिका में स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देने का संकेत देता है, वहीं भारत के लिए यह एक कूटनीतिक और आर्थिक चुनौती है। विपक्षी दलों ने इसे सरकार की कूटनीतिक विफलता करार देते हुए प्रधानमंत्री मोदी से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है।अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस फैसले के खिलाफ क्या रणनीति अपनाती है और भारतीय हितों की रक्षा के लिए अमेरिका से किस प्रकार संवाद स्थापित करती है।

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