Nava Raipur Road : नवा रायपुर के लेयर वन और टू में एक नई सड़क का निर्माण कार्य जोरों पर है। करीब 12.5 किलोमीटर लंबी और 110 मीटर चौड़ी इस सड़क का मार्ग पलौद, कोटनी, तांदुल, पौता, बंजारी और कुरूं गांवों से होकर गुजर रहा है। इस सड़क के बनने से न केवल इन गांवों का शहर से कनेक्शन बेहतर होगा, बल्कि यहां बड़ी संख्या में उद्योग, कार्यालय और आवासीय परिसर भी विकसित होंगे। इससे स्थानीय निवासियों को रोजगार और आर्थिक विकास का अवसर मिलेगा।

सड़क निर्माण से क्षेत्र में सुधार की उम्मीद
इस नई सड़क से नवा रायपुर से आरंग और अभनपुर तक का सफर भी सुगम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होने के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार के क्षेत्र में भी सुधार होगा। हालांकि, इस सड़क के लिए जिन गांवों की जमीन आएगी, उनकी खरीद-फरोख्त को लेकर प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं।

मुआवजा विवाद टालने के लिए कलेक्टर ने लगाई रोक
रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव कुमार सिंह ने प्रभावित क्षेत्रों के खसरा नंबरों की जमीन की खरीदी-बिक्री, डायवर्सन और बटांकन पर तत्काल रोक लगा दी है। इसका मकसद मुआवजा पाने के नाम पर हो रही अवैध जमीन दलाली को रोकना है। भारतमाला परियोजना में हुए मुआवजा घोटाले से सबक लेते हुए इस बार प्रशासन पूरी सतर्कता बरत रहा है।
कलेक्टर के आदेश के अनुसार, अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावित जमीन के खातों का विभाजन भी रोक दिया गया है। यदि किसी जमीन पर पहले से खनन की अनुमति है, तो उसे फिलहाल स्थगित किया गया है। यह कदम जमीन मुआवजा में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है।
जमीन दस्तावेजों की सख्त जांच
कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि मुआवजा वितरण के समय सभी जमीन मालिकों को अपने दस्तावेज जमा करने होंगे। किसी भी खाता या दस्तावेज में गड़बड़ी पाए जाने पर मुआवजा तुरंत रोक दिया जाएगा। खासतौर पर जहां एक जमीन के कई नामांतरण हुए हों, उनकी गहन जांच की जाएगी। प्रशासन किसी भी स्तर पर मुआवजा घोटाले को बर्दाश्त नहीं करेगा।
जमीन दलालों की सक्रियता और प्रशासन की चुनौती
दैनिक भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि कलेक्टर के बैन लगने से पहले ही जमीन दलाल सक्रिय हो गए थे। उन्होंने किसानों से एग्रीमेंट कर मुआवजा मिलने पर खुद को फायदेमंद स्थिति में रखा है। दलालों ने कृषि जमीन की कीमत पर जमीन खरीदी है, जबकि मुआवजा चार गुना तक अधिक मिलने की संभावना है।
ऐसे में किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि दलाल और रसूखदार फायदा उठाएंगे। प्रशासन को मिली शिकायतों के बाद बैन लगाया गया, लेकिन मुआवजा घोटाले की आशंका अभी भी बनी हुई है। कलेक्टर और प्रशासन के कई स्तरों पर जांच की प्रक्रिया जारी है।
नवा रायपुर में बनने वाली यह नई सड़क ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी। हालांकि, जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करना आवश्यक है ताकि किसानों को उचित मुआवजा मिले और फर्जीवाड़े को रोका जा सके। कलेक्टर के सख्त आदेशों और जांच से उम्मीद है कि इस बार मुआवजा वितरण में कोई गड़बड़ी नहीं होगी।
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