छत्तीसगढ़

Conversion Case: पास्टर समेत 7 पर धर्मांतरण का केस, हिंदू संगठन के विरोध के बाद FIR

Conversion Case:  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में धर्मांतरण को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। एक पास्टर समेत 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इन सभी पर धर्मांतरण केंद्र चलाने और लोगों को बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर करने का आरोप है।यह कार्रवाई तब की गई जब स्थानीय हिंदू संगठनों ने आरोप लगाते हुए थाने का घेराव किया और नारेबाजी की। उन्होंने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग की।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के मुताबिक, बिलासपुर शहर के बाहरी इलाके में एक निजी घर में लंबे समय से धार्मिक सभाएं और प्रार्थना सभाएं चल रही थीं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि यहां पर आने वाले गरीब और पिछड़े वर्ग के लोगों को लालच, भय और भावनात्मक दबाव डालकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था।

प्राप्त शिकायतों और हिंदू संगठनों के विरोध के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और पास्टर समेत 7 लोगों पर छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 और IPC की धारा 295A व 298 के तहत केस दर्ज किया।

हिंदू संगठनों का विरोध और नाराज़गी

विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, और दुर्गा वाहिनी सहित कई संगठनों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया और यह दावा किया कि यह गतिविधि स्थानीय संस्कृति और हिंदू धर्म के खिलाफ एक सुनियोजित साजिश है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मामला केवल एक धर्मांतरण नहीं, बल्कि हिंदू समाज को कमजोर करने की साजिश है।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि शुरुआती जांच में धर्मांतरण के साक्ष्य मिले हैं। कथित केंद्र से धार्मिक साहित्य, प्रचार सामग्री और चंदा रसीदें बरामद की गई हैं। सभी आरोपियों को नोटिस भेजा गया है, और जरूरत पड़ी तो उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की जाएगी।

मामला गरमाया, राजनीति शुरू

घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं ने इसे ईसाई मिशनरियों की साजिश करार दिया, वहीं कांग्रेस की ओर से इसे राजनीति से प्रेरित कार्रवाई बताया जा रहा है। हालांकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई सबूतों के आधार पर और निष्पक्ष रूप से की जा रही है। बिलासपुर का यह मामला छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण बनाम धार्मिक स्वतंत्रता की बहस को एक बार फिर गरमा रहा है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को किस दिशा में ले जाता है और अदालत का रुख क्या रहता है।

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