CAB Corruption Row : क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल (CAB) के गलियारों में इस समय घमासान मचा हुआ है। संस्था के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली और पूर्व अध्यक्ष अभिषेक डालमिया के बीच तनातनी अब खुलकर सामने आ गई है। मामला भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से जुड़ा है, जिसे लेकर पूर्व अध्यक्ष अभिषेक डालमिया ने मोर्चा खोल दिया है। डालमिया ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार की ‘स्पोर्ट्स इंटीग्रिटी एंड एंटी-करप्शन हेल्पलाइन’ का दरवाजा खटखटाया और बोर्ड के कामकाज में गंभीर गड़बड़ियों की शिकायत दर्ज कराई। इस घटनाक्रम ने राज्य के खेल जगत को दो गुटों में बांट दिया है, जिससे क्रिकेट प्रशासन की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।

आरोपों को सीएबी ने बताया बेबुनियाद और निराधार
अभिषेक डालमिया द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों को क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल ने सिरे से खारिज कर दिया है। सीएबी के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली, सचिव बाबलू कोलाय और अन्य शीर्ष अधिकारियों ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित तीन पृष्ठों का एक पत्र पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री डॉ. इंद्रनील खान को भेजा है। इस पत्र में डालमिया के दावों को पूरी तरह से निराधार और दुर्भावनापूर्ण करार दिया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि संस्था के भीतर सभी कार्य नियमानुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं, और इन आरोपों का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत द्वेष के चलते संस्था की छवि को धूमिल करना है।

सौरव गांगुली की साख का बचाव और डालमिया पर निशाना
इस आधिकारिक पत्र में सीएबी ने सौरव गांगुली के शानदार प्रशासनिक और खेल करियर का उल्लेख करते हुए उनकी ईमानदारी का पुरजोर बचाव किया है। पत्र में याद दिलाया गया कि गांगुली न केवल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे हैं, बल्कि वे सीएबी और बीसीसीआई (BCCI) के अध्यक्ष और आईसीसी क्रिकेट कमेटी के चेयरमैन जैसे प्रतिष्ठित पदों पर भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अपने पूरे करियर के दौरान गांगुली की निष्ठा और ईमानदारी पर कभी उंगली नहीं उठी है। साथ ही, बोर्ड ने अभिषेक डालमिया के इस कदम पर भी निशाना साधा कि यह मामला सीएबी का आंतरिक विषय था, जिसे सार्वजनिक करना संस्था के हितों के खिलाफ है।
वार्षिक बैठक से पहले गुटबाजी और भविष्य की चिंताएं
आगामी सितंबर माह में क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल की वार्षिक आम बैठक (AGM) प्रस्तावित है, उससे ठीक पहले मचे इस विवाद ने बोर्ड के भीतर चल रही गुटबाजी को जगजाहिर कर दिया है। खेल मंत्री को भेजे गए पत्र में यह तर्क दिया गया है कि पिछले तीन दशकों में बी.एन. दत्त, जगमोहन डालमिया, सौरव गांगुली और स्वयं अभिषेक डालमिया जैसे दिग्गजों ने इस पद को सुशोभित किया है, लेकिन कभी भी ऐसी बेबुनियाद बातें सामने नहीं आईं। बोर्ड ने व्यंग्य करते हुए कहा कि डालमिया के आरोप यह दर्शाते हैं कि शायद उनके अपने कार्यकाल को छोड़कर बाकी सभी अध्यक्षों के समय में बोर्ड का कामकाज संदिग्ध था। फिलहाल, सौरव गांगुली अपने दूसरे कार्यकाल में सीएबी की कमान संभाल रहे हैं, और इस विवाद का असर आगामी चुनावों और संस्था की कार्यप्रणाली पर पड़ना तय माना जा रहा है।
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