CRPF Suicide Cases : केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों के बीच आत्महत्या के बढ़ते मामलों ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में CRPF के 59 जवानों ने आत्महत्या की, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है। रिपोर्ट बताती है कि आत्महत्या करने वाले अधिकांश जवान कांस्टेबल रैंक के थे। लगातार बढ़ते मामलों ने जवानों की मानसिक सेहत, कार्य परिस्थितियों और तनावपूर्ण ड्यूटी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पांच वर्षों में 262 जवानों ने की आत्महत्या
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 से 2025 के बीच कुल 262 CRPF कर्मियों ने आत्महत्या की। इनमें से 202 जवानों, यानी लगभग 77 प्रतिशत से अधिक, ने ड्यूटी के दौरान यह कदम उठाया। शेष जवानों ने अवकाश या छुट्टी के दौरान आत्महत्या की। यह आंकड़ा दर्शाता है कि ड्यूटी के दौरान होने वाला मानसिक और शारीरिक दबाव जवानों के जीवन पर गहरा असर डाल रहा है।

2025 में सबसे अधिक मामले दर्ज
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 आत्महत्या के मामलों के लिहाज से सबसे चिंताजनक रहा। पिछले पांच वर्षों के आंकड़े इस प्रकार हैं—
- 2021: 57 मामले
- 2022: 43 मामले
- 2023: 57 मामले
- 2024: 46 मामले
- 2025: 59 मामले
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुछ वर्षों में गिरावट के बाद 2025 में मामलों में फिर से उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
जुलाई 2026 तक बढ़कर 281 पहुंची संख्या
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2021 से लेकर जुलाई 2026 तक आत्महत्या के कुल 281 मामले दर्ज किए गए। इनमें से वर्ष 2026 के पहले सात महीनों में ही 19 जवानों ने आत्महत्या की। कुल मामलों में 237 जवान नॉन-गजटेड रैंक के थे, जिससे संकेत मिलता है कि निचले स्तर के कर्मियों पर मानसिक दबाव अपेक्षाकृत अधिक है।

आत्महत्या के प्रमुख कारण क्या रहे?
रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश मामलों में आत्महत्या के पीछे पारिवारिक और घरेलू समस्याएं प्रमुख कारण के रूप में सामने आई हैं। इसके अलावा लंबी और कठिन ड्यूटी, लगातार तनाव, जिम्मेदारियों का बोझ, सीमित अवकाश, कठोर अनुशासन और मानसिक दबाव भी जवानों की स्थिति को प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक परिवार से दूर रहना, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना और लगातार उच्च सतर्कता की स्थिति में रहना मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है।
किस तरीके से की गईं आत्महत्याएं?
रिपोर्ट में आत्महत्या के तरीकों का भी उल्लेख किया गया है। आंकड़ों के अनुसार—
- 128 जवानों ने फांसी लगाकर आत्महत्या की।
- 118 जवानों ने गोली मारकर जान दी।
- 12 मामलों में जहर खाकर आत्महत्या की गई।
- 2 मामलों में ट्रेन के सामने कूदने या अन्य गंभीर तरीकों से आत्महत्या की गई।
ये आंकड़े समस्या की गंभीरता और तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाते हैं।
देश की सबसे बड़ी आंतरिक सुरक्षा बलों में शामिल है CRPF
CRPF देश की सबसे बड़ी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में से एक है, जिसमें लगभग 3.25 लाख जवान कार्यरत हैं। यह बल आतंकवाद-रोधी अभियानों, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, चुनाव ड्यूटी, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाता है।अधिकारियों के अनुसार, CRPF के लगभग 95 से 97 प्रतिशत जवान लगातार फील्ड ड्यूटी, आतंकवाद विरोधी अभियानों या कानून-व्यवस्था बनाए रखने जैसे चुनौतीपूर्ण कार्यों में तैनात रहते हैं। ऐसे वातावरण में लंबे समय तक काम करने से मानसिक तनाव बढ़ना स्वाभाविक माना जाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ा फोकस
जवानों की बढ़ती मानसिक चुनौतियों को देखते हुए सुरक्षा बलों द्वारा पहले से कई कल्याणकारी कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें तनाव प्रबंधन कार्यक्रम, मनोवैज्ञानिक परामर्श, हेल्पलाइन सेवाएं, योग, ध्यान और वेलनेस गतिविधियां शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते मामलों को देखते हुए मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को और मजबूत करने, समय पर काउंसलिंग उपलब्ध कराने तथा पारिवारिक सहयोग तंत्र को बेहतर बनाने की जरूरत है।
बढ़ते आंकड़े बने चिंता का विषय
रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि CRPF जवानों के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां गंभीर रूप ले रही हैं। लगातार कठिन परिस्थितियों में ड्यूटी, पारिवारिक समस्याएं और कार्य का दबाव जवानों के जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सुरक्षा जिम्मेदारियों पर ही नहीं, बल्कि जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक सहयोग और जीवन की गुणवत्ता पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को कम किया जा सके।
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