Petrol Diesel Rates
Petrol Diesel Rates : वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आग अब डराने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत के विफल होने और होर्मुज स्ट्रेट की संभावित नाकेबंदी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 104 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। इस भारी उथल-पुथल के बावजूद, भारतीय तेल विपणन कंपनियों ने आज यानी 13 अप्रैल 2026 को आम जनता के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। हालांकि, विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि वैश्विक तनाव जल्द कम नहीं हुआ, तो घरेलू बाजार में भी ईंधन की कीमतों में इजाफा होना तय है।
देश के विभिन्न हिस्सों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.67 प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं, मुंबई में पेट्रोल ₹103.54 और चेन्नई में ₹100.93 प्रति लीटर है। लखनऊ में कीमतें ₹94.73 और जयपुर में ₹105.21 दर्ज की गई हैं। दक्षिण भारत के हैदराबाद और तिरुवनंतपुरम जैसे शहरों में पेट्रोल का भाव ₹107 के स्तर को पार कर चुका है। कीमतों में यह स्थिरता तेल कंपनियों के ‘वेट एंड वॉच’ (Wait and Watch) रवैये को दर्शाती है, जबकि अंतरराष्ट्रीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
भले ही घरेलू वाहनों के लिए कीमतें स्थिर हों, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल (Industrial Diesel) की कीमतों में 25% की भारी वृद्धि की है, जो प्रति लीटर ₹28.22 की बढ़ोतरी है। इसके अतिरिक्त, 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भी उछाल आया है। दिल्ली में अब कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹2,078.50 हो गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर लॉजिस्टिक्स, होटल और रेस्टोरेंट उद्योग पर पड़ेगा, जिससे आने वाले दिनों में बाहर खाना और सामानों की ढुलाई महंगी हो सकती है।
महंगाई के इस दौर में आम आदमी की रसोई के लिए एक अच्छी खबर है। 14.2 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली में इसकी कीमत ₹913 पर स्थिर है। मार्च के बाद से इस श्रेणी में कोई वृद्धि न होना मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत की बात है। सरकार की कोशिश है कि वैश्विक ऊर्जा संकट का सीधा असर आम नागरिक के किचन बजट पर न पड़े।
विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी राज्य विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने का हरसंभव प्रयास कर रही है। घाटे को कम करने के लिए तेल कंपनियों ने एक नई आंतरिक व्यवस्था अपनाई है। इसके तहत, सरकारी कंपनियां अब रिफाइनरियों से रियायती दरों (Discounted Price) पर कच्चा तेल खरीद रही हैं। यह रणनीति वैश्विक कीमतों में उछाल के बावजूद घरेलू खुदरा कीमतों को स्थिर रखने में मददगार साबित हो रही है।
भले ही आज पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर हैं, लेकिन $104 का क्रूड ऑयल स्तर भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत अपनी तेल जरूरतों का 85% आयात करता है। यदि अमेरिका-ईरान तनाव और अधिक खिंचता है, तो सरकारी खजाने और तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा। ऐसे में देखना होगा कि सरकार कब तक इन कीमतों को थामे रख पाती है। फिलहाल, जनता के लिए राहत बरकरार है, लेकिन कमर्शियल दरों में हुई वृद्धि महंगाई की नई लहर का संकेत दे रही है।
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