Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर जोरदार तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसका सीधा असर क्रूड ऑयल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा है। बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के कारण आगे भी कीमतों में तेजी की आशंका बनी हुई है।
एक सप्ताह में करीब 11 फीसदी महंगा हुआ Brent
ब्रेंट क्रूड की कीमत में पिछले एक सप्ताह के दौरान लगभग 11 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। मंगलवार को ही ब्रेंट के दाम में करीब 4.6 फीसदी का उछाल आया था। इसके बाद बुधवार के शुरुआती कारोबार में भी कीमत लगभग 1 फीसदी बढ़ गई। कुछ ही दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी ने निवेशकों और तेल कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब बाजार में यह चर्चा तेज हो गई है कि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने पर ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर सकता है।
अमेरिका-ईरान संघर्ष से सप्लाई पर बढ़ा दबाव
तेल बाजार में मौजूदा तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव माना जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण का दावा किया गया है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर जोखिम बढ़ा है। निवेशकों को आशंका है कि यदि दोनों देशों के बीच संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है, तो पश्चिम एशिया से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
Strait of Hormuz बना बाजार की सबसे बड़ी चिंता
तेल कारोबारियों के लिए स्ट्रेट ऑफ हार्मुज की स्थिति इस समय सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है। अगर यहां जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो दुनिया के कई देशों तक तेल पहुंचाने में मुश्किल पैदा हो सकती है। यही वजह है कि बाजार किसी भी संभावित रुकावट को लेकर पहले से सतर्क हो गया है और क्रूड की कीमतों में जोखिम प्रीमियम बढ़ रहा है।
दो टैंकरों पर हमले से बढ़ी शिपिंग की चिंता
सोमवार को स्ट्रेट ऑफ हार्मुज से बाहर निकल रहे दो तेल टैंकरों पर हमले की खबर सामने आने के बाद बाजार की चिंता और बढ़ गई। इस घटना ने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया का तनाव केवल सैन्य गतिविधियों और राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रह गया है। इसका असर तेल की वास्तविक समुद्री शिपिंग पर भी पड़ सकता है। इसके बाद ट्रेडर्स ने संभावित सप्लाई संकट से बचने के लिए वैकल्पिक क्रूड स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है।
लंबे समय तक रुकावट से हो सकती है बड़ी परेशानी
तेल बाजार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में लंबे समय तक जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो क्या वैकल्पिक मार्गों से तेल की कमी पूरी की जा सकेगी। कारोबारियों के लिए इसका जवाब आसान नहीं है। पश्चिम एशिया से होने वाली बड़ी मात्रा में तेल सप्लाई को दूसरे रास्तों से भेजना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी स्थिति में वैश्विक बाजार में कीमतों पर और दबाव बढ़ने की आशंका है।
ईरान की धमकी ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की ओर से भी संकेत दिए गए हैं कि अमेरिका की ताजा कार्रवाई के बाद स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में शिपिंग पर दबाव बढ़ सकता है। इस तरह की चेतावनियों ने तेल बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। निवेशक अब सैन्य घटनाक्रम के साथ-साथ समुद्री मार्गों की स्थिति पर भी नजर बनाए हुए हैं।
100 डॉलर के पार जा सकता है Brent Crude
कच्चे तेल की मौजूदा तेजी को देखते हुए अब ब्रेंट क्रूड के 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका चर्चा में है। यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहराता है तथा तेल की सप्लाई या शिपिंग में वास्तविक बाधा आती है, तो कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है। आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज में जहाजों की आवाजाही क्रूड ऑयल की दिशा तय करने वाले सबसे अहम कारक रहेंगे।
Read More : NHAI Toll Scam : NHAI टोल फर्जीवाड़े में ED का बड़ा एक्शन, 7 राज्यों में 14 ठिकानों पर रेड